पार्षदों का तैयार हो रहा रिपोर्ट कार्ड, मनपा चुनाव की पूर्व तैयारी में जुट गया सत्तापक्ष

    • 10,000 कापियां प्रति प्रभाग बनाने की हिदायत
    • 108 पार्षद सत्तापक्ष के

    नागपुर. मनपा के आम चुनावों को लेकर राज्य चुनाव आयोग की ओर से वार्ड रचना को लेकर अधिसूचना जारी की गई. हालांकि चुनाव को भले ही 4-5 माह का समय बचा हो लेकिन मनपा में सत्तापक्ष भाजपा ने चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं. इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गणेशोत्सव खत्म होते ही सोमवार को सत्तापक्ष नेता ने 108 पार्षदों की बैठक ली जिनमें सभी पार्षदों को अपने कार्यकाल में किए गए विकास कार्यों का उल्लेख कर रिपोर्ट कार्ड तैयार करने की हिदायत दी गई. यहां तक कि प्रत्येक प्रभाग में 4-4 पार्षदों को एक ही रिपोर्ट पुस्तिका तैयार कर प्रभाग में बांटने को कहा गया है. प्रत्येक प्रभाग में कम से कम 10,000 प्रतियां तैयार करना है. हालांकि सोमवार को हुई बैठक में कई पार्षद तो नहीं पहुंच पाए लेकिन विशेष रूप से महिला पार्षदों की उपस्थिति दर्ज की गई. 

    नेताओं के भरोसे नैया

    बैठक में सत्तापक्ष नेता ने कहा कि 5 वर्षों में कई विकास कार्य किए जा चुके हैं. भले ही सांसद निधि हो या फिर विधायक निधि या फिर स्थानीय निधि से विकास किया गया हो, सभी का उल्लेख रिपोर्ट कार्ड में किया जाना चाहिए. जानकारों के अनुसार मनपा की आर्थिक स्थिति को देखते हुए कार्यकाल में विकास कार्य नहीं होने का अंदाजा लगाया जा सकता है. कम से कम गत 3 वर्षों से कुछ भी खास कार्य नहीं हो पाए हैं. विकास के संदर्भ में चर्चा करते समय सत्तापक्ष की ओर से हमेशा ही केंद्र और राज्य सरकार की ओर से गत समय किए गए कार्यों का बढ़-चढ़कर उल्लेख होता है लेकिन महानगर पालिका के माध्यम से क्या विकास किया गया इसका कभी भी उल्लेख नहीं होता. यही कारण है कि भले ही पार्षदों को रिपोर्ट कार्ड तैयार करने को कहा गया हो लेकिन अधिकांश पार्षदों की नैया भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के भरोसे ही है. 

    पार्षदों को छूटा पसीना

    सूत्रों के अनुसार बैठक में दी गई हिदायत के अनुसार पार्षदों ने रिपोर्ट कार्ड तैयार करने की हामी तो भर दी किंतु बाहर निकलते ही विकास कार्यों के लिए मिली निधि को लेकर नाराजगी के सुर भी सुनाई दिए. कुछ पार्षदों का मानना था कि पूरे कार्यकाल में केवल कुछ वरिष्ठ पार्षदों ने निधि ली है, जबकि अधिकांश पार्षद नए थे जिन्हें पार्षद और वार्ड निधि के अलावा अलग से कुछ खास निधि का आवंटन नहीं हुआ है. कुछ पार्षदों का मानना था कि मनपा में जिसे भी पद मिला, केवल उसी का लाभ हुआ है. उसी को अधिक विकास निधि मिली है अन्यथा सत्तापक्ष में रहने के बावजूद भेदभाव हुआ है. यही कारण है कि अब रिपोर्ट कार्ड बनाने के लिए पार्षदों को पसीना छूट रहा है.