Tukaram Mundhe

  • 20 करोड़ के भुगतान का मामला पड़ गया ठंडा

नागपुर. महानगर पालिका में मुंढे के आयुक्त बनकर आने के बाद से ही सत्तापक्ष के साथ ठनी रही. दोनों के बीच हुए ‘कोल्ड वार’ का हश्र यह था कि केवल उनकी कार्यप्रणाली पर कोरोनाकाल में पहली बार एकसाथ 5 दिनों तक सभा चलती रही. इसके अलावा पहली बार ही स्मार्ट सिटी की बैठक में होनेवाली फैसले एजेंडे के रूप में उजागर हुए. हालांकि उससे पहले भी स्मार्ट सिटी की बैठकें होती रही और वर्तमान में भी स्मार्ट सिटी की बैठकों का सिलसिला जारी है लेकिन बैठकों का एजेंडा अब लॉक हो गया है.

केवल मुंढे के कार्यकाल में बैठक का एजेंडा उजागर होता रहा है. यहीं कारण है कि एक ठेकेदार को अधिकार नहीं होने के बावजूद अवैध रूप से 20 करोड़ का भुगतान किए जाने पर भाजपा ने आक्रामक रुख अपनाया था. शहर के पुलिस आयुक्त को ज्ञापन देकर पूरे मामले की तुरंत जांच करने की मांग की गई थी. किंतु अब मुंढे के जाने के बाद ‘जंग’ पर जंग लग गई है. 

कहां अटका है मामला

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में से 20 करोड़ का निधि ठेकेदार को देने की शिकायत 21 जून 2020 को ही स्मार्ट सिटी के संचालक रहे संदीप जोशी और सत्तापक्ष नेता के रूप में संदीप जाधव ने डीसीपी से की थी. डीसीपी की ओर से शिकायत को आर्थिक अपराध अन्वेषण विभाग को भेजने का आश्वासन दिया था. किंतु अब तक किसी भी तरह की जांच शुरू नहीं हुई है. भाजपा का मानना था कि किसी मामले में आम जनता या राजनीतिक दल के किसी नेता या कार्यकर्ता पर आरोप लगते ही तुरंत कार्रवाई की जाती है. किंतु आईएएस अधिकारी यदि नियमों को ताक पर रखकर गैरकानूनी कार्य करता है तो उसके खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं होना दुखद है. अब स्मार्ट सिटी के संचालक, पुलिस आयुक्त और मनपा आयुक्त भी बदल गए है. इसके बाद भी मामला कहां अटक गया. इसे कोई उजागर नहीं कर रहा है. 

बैंक भी क्यों हो गया मौन

-एक ओर जहां स्मार्ट सिटी के संचालक के रूप में महाराष्ट्र बैंक को पत्र देकर कार्रवाई करने की मांग की गई थी. अब भाजपा विधायकों के शिष्टमंडल की ओर से भी संयुक्त शिकायत पत्र बैंक को सौंपा था. 

-व्यवस्थापक से कहा गया था कि केंद्रीय मंत्री गडकरी के प्रयासों से केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी का प्रोजेक्ट मंजूर किया था. साथ ही निधि भी प्रदान की मनपा का बैंक ऑफ महाराष्ट्र में पहले से खाता चल रहा है. इसीलिए स्मार्ट सिटी का भी खाता इसी बैंक में खोला गया. 

-स्मार्ट सिटी बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की हुई पहली बैठक में आयुक्त मुख्य अधिकारी होने के नाते और उनके हस्ताक्षर से खाता खोलने का निर्णय लिया गया था. किंतु इसके बाद किसी भी प्रकार के स्पष्ट आदेश नहीं थे. इसके बावजूद मुंढे के दस्तखत जोड़े गए. 

-जिसके माध्यम से बैंक से 20 करोड़ का भुगतान किया गया. लंबा समय बीत जाने के बावजूद भाजपा की ओर से न तो बैंक से स्पष्टीकरण मांगा गया और न ही इसके प्रयास किए गए. जबकि बैंक पूरे मामले पर मौन साधे हुए है.