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    नागपुर. कोरोना को लेकर तमाम तरह के उपायों के बावजूद स्थिति तेजी से बिगड़ती जा रही है. गुरुवार की शाम तक सिटी के अधिकांश अस्पतालों में यह हालत थी कि गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड खाली नहीं थे. मेयो और मेडिकल में आईसीयू बेड भर गये हैं. वहीं चौबीस घंटे के भीतर हुई 47 लोगों की मौत ने एक बार फिर पिछले वर्ष के सितंबर की यादें ताजा कर दी है.

    जिले में कोरोना से हालत दिनोंदिन बिगड़ते जा रहे हैं. लॉकडाउन के बाद भी कोरोना की चेन नहीं टूट सकी. बल्कि इसके विपरीत ही स्थिति देखने को मिल रही है. हर दिन जहां पॉजिटिव मरीज बढ़ते जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मरने वालों की संख्या में भी वृद्धि हो रही हैं. प्राइवेट अस्पतालों ने अभी से हाऊस फुल का बोर्ड लगा दिया है. गंभीर मरीजों को भर्ती करने के लिए आईसीयू में बेड खाली नहीं होने से अन्य अस्पतालों में भर्ती कराने की सलाह दी जा रही है. जिन मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत नहीं है, उन्हीं मरीजों को भर्ती किया जा रहा है.

    चौबीस घंटे सेवा दे रहे निवासी डॉक्टर 

    मेडिकल में बुधवार की रात तक 90 नये बेड की व्यवस्था की गई. लेकिन गुरुवार तक 60 बेड ही उपलब्ध हो सके थे. इसमें शाम तक 45 से अधिक बेड पर मरीजों को भर्ती किया जा चुका था. जबकि आईसीयू में भर्ती करने के लिए कुछ वेटिंग पर चल रहे हैं. यही स्थिति मेयो में भी बनी हुई है. मरीज बढ़ने के साथ ही मैन पावर की भी कमी महसूस होने लगी है. हालांकि, मेडिकल और मेयो में डॉक्टर तो है लेकिन नर्स और अन्य स्टाफ की कमी बनी हुई है. यही वजह रही कि गुरुवार से जूनियर निवासी डॉक्टरों की भी चौबीस घंटे के लिए ड्यूटी लगाई गई. वैसे जेआर-1 पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं होते. लेकिन मेडिकल में पिछले सप्ताह से डॉक्टर और नर्स के लगातार पॉजिटिव होने से यह नौबत आ गई है. सीनियर निवासी डॉक्टर भी चौबीस घंटे सेवा दे रहे हैं. 

    स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर प्राशसकीय कार्य में ही 

    सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के पास विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी नहीं है,लेकिन विभाग ने अपने अधिकांश विशेषज्ञ डॉक्टरों को आरटीपीसीआर टेस्टिंग प्रक्रिया सहित मैनेजमेंट और प्रशासकीय काम में लगाकर रखा है. यही वजह है कि स्टाफ की कमी होने लगी है. अब आवश्यकता है कि विभाग अपने विशेषज्ञ डॉक्टरों को मेडिकल-मेयो में सेवा देने के लिए तैयार करे. वर्तमान में मेडिकल और मेयो में प्रेशर बढ़ गया है. प्राइवेट अस्पतालों में किसी भी मरीज के क्रिटिकल होने पर मेयो और मेडिकल में ही रेफर किया जा रहा है. इससे एक बार फिर दोनों शासकीय मेडिकल कॉलेजों में मृत्यु दर बढ़ती नजर आ रही है. मनपा के अस्पतालों में भी गंभीर होने वाले मरीजों को दोनों जगह रेफर किया जा रहा है.

    अगले 2 सप्ताह ज्यादा खतरनाक 

    डॉक्टरों की माने तो अगले दो सप्ताह सिटी सहित जिले के लिए बेहद खतरनाक हो सकते हैं. इन दिनों में मरीजों की संख्या के साथ ही संक्रमितों भी संख्या बढ़ सकती है. डॉक्टरों का कहना है कि इन दिनों ऑक्सीजन की कमी वाले मरीज अधिक आ रहे हैं. वहीं, होम आइसोलेशन में रहकर उपचार कराने के बाद अचानक ऑक्सीजन लेवल कम होने से मरीज अस्पातल में भर्ती होने आ रहे हैं. यदि शुरुआती दौर में ही विशेषज्ञ डॉक्टरों से उपचार करा लिया जाये तो इस स्थिति से बचा जा सकता है. डॉक्टरों ने पहले ही आगाह किया था कि मौसम की मार 3-4 दिनों बाद अपना असर दिखाएगी. स्थिति बिल्कुल वैसे ही देखने को मिल रही हैं.