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    • गंतव्य तक पहुंचने का समय कम नहीं होने से यात्री हैरान  
    • ट्रेनों के विलंब से चलने का सिलसिला भी बरकरार 

    नागपुर. रेलवे ने नागपुर मंडल में भले ही ट्रेनों की स्पीड बढ़ाकर 130 से 140 किमी प्रति घंटा कर दी है लेकिन हकीकत में इसका लाभ यात्रियों को नहीं मिल पा रहा है. ट्रेनें पूर्व निर्धारित शेड्यूल के अनुसार ही चल रही हैं. यही नहीं, ट्रेनों के लेट चलने का सिलसिला भी पहले की तरह बरकरार है जिससे यात्रियों को काफी परेशानी हो रही है. 

    दरअसल रेलवे पहले ट्रेनों को 90 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ा रही थी. सेंट्रल रेलवे और दपूमरे के नागपुर डिवीजन में थर्ड लाइन और फोर्थ लाइन का काम तेजी से चला है. अधिकांश काम पूरा हो जाने के बाद रेल अधिकारियों ने 2 महीने पहले औपचारिक रूप से ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने का ऐलान कर दिया. लोको पायलट और परिचालन से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को भी बढ़ी हुई स्पीड पर ट्रेनों को चलाने के निर्देश दे दिए गए हैं.

    ट्रेनों की रफ्तार बढ़ने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि गंतव्य तक पहुंचने के समय में कमी आएगी. परंतु जमीनी स्तर पर ऐसा कुछ भी बदलाव नजर नहीं आया है. सभी ट्रेनें पूर्व निर्धारित समय सारिणी के अनुसार चल रही हैं. कई ट्रेनें तो घंटों विलंब से चल रही हैं. ऐसे में यात्री खुद को ठगा-सा हुआ महसूस कर रहे हैं. भारतीय यात्री केंद्र के सचिव बसंत कुमार शुक्ला का कहना है कि रेलवे रफ्तार बढ़ाने का दावा कर रही है लेकिन उसका प्रभाव जमीनी स्तर पर नजर नहीं आ रहा है. हर वर्ष 1 जुलाई से रेलवे की नई समय सारिणी मिलनी शुरू हो जाती है लेकिन इस बार विलंब हो रहा है. 

    कम किए जा रहे हैं स्टॉपेज 

    रेल अधिकारियों का कहना है कि ट्रेनों की रफ्तार बढ़ी जरूर है लेकिन ट्रैक मेंटेनेंस के लिए ब्लॉक लेने से गंतव्य तक पहुंचने के समय में बदलाव नजर नहीं आ रहा है. ट्रेनों की स्पीड को बनाए रखने में कई सारे स्टॉपेज बाधक बने हुए हैं जिन्हें हटाने का कार्य जारी है. स्टॉपेज के कम होने के बाद गंतव्य तक पहुंचने का समय घटेगा. फिलहाल इस कार्य में 1 वर्ष का समय लगेगा.  

    कई डिवीजनों में बेहद खराब प्रदर्शन 

    रेलवे के लुमडिंग, इज्जतनगर, लखनऊ, मालदा सहित कई डिवीजनों में ट्रेनों की औसत स्पीड 30 से 45 किमी प्रति घंटे ही है. किसी भी डिवीजन में औसत स्पीड 64 किमी प्रति घंटे से अधिक नहीं है. हालांकि रेलवे बोर्ड का दावा है कि इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है. ट्रेनों की स्पीड और टाइमिंग में सुधार को लेकर भी बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं लेकिन उसके परिणाम यात्रियों को दिखाई नहीं दे रहे हैं.