Nagpur High Court

    • 16.80 करोड़ की थी लागत
    • 20.62 करोड़ तक बढ़ी कीमत

    नागपुर. मेडिकल अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी सिस्टम स्थापित करने के लिए मशीनरी की लागत बढ़ गई. बढ़ी कीमतों के अनुसार जिला माइनिंग निधि के सदस्य सचिव एवं जिलाधिकारी को अतिरिक्त निधि उपलब्ध कराने के लिए मेडिकल डीन की ओर से अनुरोध पत्र भेजा गया लेकिन अब तक निधि उपलब्ध नहीं कराई गई. इस संदर्भ में अदालत मित्र की ओर से ध्यानाकर्षित करते ही न्यायाधीश सुनील शुक्रे और न्यायाधीश जी.ए. सानप ने जिलाधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई.

    अदालत ने आदेश में कहा कि दुर्भाग्य से जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा इस प्रकल्प के महत्व को नजरअंदाज किया जा रहा है. अदालत ने आदेश में कहा कि रोबोटिक सर्जरी सिस्टम को स्थापित करना केवल सिटी ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य भारत के लिए महत्वपूर्ण प्रकल्प है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से मरीजों का यहां आना लगा रहता है जिन्हें इसका लाभ होगा. सरकार की ओर से विशेष वकील अधि. फिरदौस मिर्जा ने पैरवी की.

    …तो PSR निधि से लें राशि

    सुनवाई के दौरान अदालत मित्र अनूप गिल्डा ने कहा कि प्राथमिक स्तर पर रोबोटिक सर्जरी सिस्टम लगाने के लिए 16.80 करोड़ की लागत लगने का अनुमान लगाया गया था. किंतु मंगाए गए टेंडर में सबसे न्यूनतम बोली 20,62,42,862 रु. लगाई गई. जिससे 3,82,42,862 रु. की अतिरिक्त आवश्यकता है. जिला माइनिंग निधि की ओर से 16.80 करोड़ रु. पहले ही दिए गए हैं. सरकार की ओर से अतिरिक्त निधि को भी मंजूरी दी गई है. मेडिकल डीन की ओर से अतिरिक्त निधि के लिए 11 मार्च और 19 अप्रैल को जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है लेकिन जिलाधिकारी कार्यालय की ओर से अब तक इस निधि के संदर्भ में कोई निर्णय नहीं लिया गया है. जिसके बाद अदालत ने कहा कि यदि जिला माइनिंग निधि में से इतनी राशि देना संभव न हो रहा हो तो जिलाधिकारी के पास सीएसआर निधि अंतर्गत राशि है. उसमें से एक करोड़ तक का निधि दी जा सकेगी.

    2 सप्ताह में दें रिपोर्ट

    इस आदेश का पालन 2 सप्ताह के भीतर करने के आदेश जिलाधिकारी और जिला माइनिंग निधि के सभी सदस्यों को अदालत की ओर से दिए गए. साथ ही अदालत को रिपोर्ट देने के भी आदेश दिए. सुनवाई के दौरान अदालत मित्र की ओर से सरकार के वित्त विभाग सचिव और जिलाधिकारी को प्रतिवादी बनाने की स्वतंत्रता देने की मांग की गई. अदालत ने दोनों को प्रतिवादी बनाकर नोटिस जारी किया. साथ ही विस्तृत हलफनामा दायर करने के आदेश भी दिए.