Vidarbha Rajya Andolan Samiti

    नागपुर. स्वतंत्र विदर्भ राज्य की मांग के साथ  कोरोना काल का बिजली बिल विदर्भ की जनता के लिए माफ करने की मांग को लेकर शहीद चौक पर किये जा रहे ठीया आंदोलन को उठाने के लिए दूसरे दिन सुबह 9 बजे अचानक पुलिस ने धावा बोल दिया. दंगारोधी पुलिस दल वहां पहुंची. उस समय वामनराव चटप और कुछ विदर्भवादी ठीया आंदोलन में बैठे हुए थे. पुलिस ने चटप को गिरफ्तार कर लिया और वहां से तहसील पुलिस थाना ले गई. जब चटप की गिरफ्तारी का पता अन्य विदर्भवादी नेताओं और विरास के कार्यकर्ताओं को चला तो वे बड़ी संख्या में आंदोलन स्थल पर पहुंच गये. विदर्भ राज्य आंदोलन समिति के मुख्य संयोजक राम नेवले के नेतृत्व में आंदोलन शुरू किया गया लेकिन पुलिस ने सभी को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया. पुलिस के इस ‘तानाशाही’ रवैये के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई लेकिन पुलिस ने नेवले सहित सभी पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया. 

    मंदिर किया सील

    आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार करने के साथ ही आंदोलन स्थल पर उनके सामान को भी अस्त-व्यस्त कर दिया गया. वहां लगे पोस्टर्स और बैनर भी पुलिस ने फाड़ दिये. इतना ही नहीं, शहीद चौक स्थित विदर्भ चंडिका मंदिर को भी सील कर दिया गया. नेवले व चटप ने पुलिस के इस रवैये को तानाशाही करार दिया. उन्होंने कहा कि अपने हक की मांग के लिए आंदोलन करना जनता का अधिकार है जिसका पुलिस हनन कर रही है. दादागिरी से आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है. जब तक विदर्भ राज्य की मांग पूरी नहीं की जाएगी आंदोलन जारी रहेगा. नेवले ने कहा कि पुलिस ने महिला पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को भी गिरफ्तार किया और उन्हें जबरदस्ती वाहनों में ठूंसा गया. कुछ महिलाओं को इससे चोट भी आईं. 

    1 घंटे रास्ता रोको

    विदर्भवादियों ने टांगा स्टैंड इतवारी में 1 घंटे तक रास्ता रोको किया. महिला आघाड़ी की रंजना मामर्डे, युवा आघाड़ी के मुकेश मासुरकर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा कार्यकर्ता आंदोलन में शामिल हुए. उनका आरोप है कि पुलिस ने चिढ़कर बैनर तक फाड़ डाला. जबरदस्ती वैन में ठूंस कर थाना ले गए. आंदोलनकारियों ने कहा कि यह तानाशाही चलने नहीं देंगे. आंदोलन जारी रहेगा. गिरफ्तार होने वालों में सुनील वडस्कर, रेखा निमजे, सुनीता येरणे, प्रशांत जयकुमार, वृषभ वानखेडे, ज्योति खांडेकर, गणेश शर्मा, ऊषा लांबट, शैलेश धर्माधिकारी, सुदाम राठोड, राजेंद्र आगरकर, राज ठाकुर, वीना भोयर, डशा लांबट, राजू बोरकर, विजय मौदेकर, संजय हिंगे, अशोक हांडे, राजेंद्र सिंह ठाकुर, मुन्‍ना दुर्गे, प्‍यारूभाई, घीसू पाटील, सुनील साबले, विष्‍णु पाटिल, अशोक पाटिल, गोविंदराव चिंतावार, मोराती गडपल्‍लीवार, रामराव ताडपल्‍लीवार सहित बड़ी संख्या में विदर्भवादियों का समावेश है.