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    नागपुर. भारत निर्वाचन आयोग की ओर से मंगलवार को राज्य के 5 शहरों में 6 स्थानीय निकाय की विधान परिषद सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की. विधान परिषद की इन 6 सीटों के सदस्यों का कार्यकाल नए वर्ष की शुरुआत में ही 1 जनवरी को समाप्त होने जा रहा है. उससे पहले नए सदस्यों के चुनाव के लिए कार्यक्रम घोषित होते ही सिटी की विधान परिषद सीट को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई. हालांकि राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर जुटे हुए थे किंतु इतनी जल्दी चुनाव घोषित होने की आशा नहीं थी.

    राजनीतिक जानकारों के अनुसार भले ही राज्य में महाविकास आघाड़ी की सत्ता हो, लेकिन महाविकास आघाड़ी उम्मीदवार को ढूंढ रही है. जबकि भाजपा में दावेदार पहले से मौजूद है. महानगर पालिका, जिला परिषद, नगर परिषद, नगर पंचायत जैसी स्थानीय निकाय के पार्षदों से विधान परिषद के लिए सदस्य चुना जाना है. यही कारण है कि प्रत्येक इकाई पर जोड़-तोड़ की राजनीति तेज हो गई है.

    फडणवीस तय करेंगे प्रत्याशी

    जानकारों के अनुसार रिक्त हो रही गिरीश व्यास की सीट के लिए दावेदारों में सबसे आगे वर्तमान पार्षद वीरेन्द्र कुकरेजा, पूर्व मंत्री रहे चंद्रशेखर बावनकुले, पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय भेंडे के नामों पर चर्चा जारी है. जानकारों के अनुसार बुधवार को विधान सभा में विपक्ष के नेता देवेन्द्र फडणवीस शहर में होने की उम्मीद है. जिससे यहां होनेवाली बैठक में ही किसी नाम पर मुहर भी लग सकती है. राजनीतिक जानकारों के अनुसार विधानसभा चुनावों के दौरान संबंधित सीटों के जातीय समीकरण को देखते हुए प्रत्याशी का चयन होता है. किंतु विधान परिषद के लिए सदस्य का चयन करते समय भाजपा की ओर से सर्वप्रथम संघकारण, अर्थकारण और बाद में राजकारण को ध्यान में रखकर प्रत्याशी का चयन होता है. यही कारण है कि तीनों समीकरणों में फिट बैठ रहे कुकरेजा को प्रबल दावेदार माना जा रहा है.

    कांग्रेस ने पार्टी प्रमुख को भेजे 4 नाम

    जानकारों के अनुसार विधान परिषद की इन सीटों में अर्थकारण सर्वाधिक महत्व रखता है. चूंकि स्थानीय निकाय के पार्षदों द्वारा वोटिंग होती है. अत: स्थानीय राजनीति में नेताओं के प्रबलता की भी काफी पैठ रहती है. यही कारण है कि इन सभी स्तर से जुड़नेवाले 4 नामों पर कांग्रेस द्वारा विचार किया जा रहा है. हमेशा की तरह दिल्ली से ही प्रत्याशी पर अंतिम मुहर लगेगी. जिसके लिए राज्य इकाई की ओर से 4 नामों की सिफारिश की गई है. माना जा रहा है कि इन नामों में सबसे आगे राजेन्द्र मुलक का नाम है. जिसके बाद अमोल देशमुख के अलावा और 2 नाम भी है. सूत्रों के अनुसार कुछ  ऐसे नाम भी है,जो कांग्रेस में तो नहीं है किंतु समय पर कांग्रेस में प्रवेश कर यह टिकट पा सकते हैं. 

    आंकड़ों के समीकरणों में उलझे दल

    राजनीतिक जानकारों के अनुसार वर्तमान में विधान सभा की नागपुर सीट पूरी तरह आंकड़ों के समीकरणों में उलझी हुई है. महानगर पालिका को छोड़कर जिला परिषद और अन्य निकाय के हाल ही में हुए चुनावों के बाद कुछ समीकरण भाजपा के विरोध में गए है. इसके बावजूद भाजपा और कांग्रेस में काफी टसल होने से इनकार नहीं किया जा सकता है. इस सीट के लिए महानगर पालिका के 151 वोट, जिला परिषद के 58 वोट, नगर परिषद में 341 वोट मिलाकर कुल 550 वोट दिए जाने है. जिसमें से सर्वाधिक नागपुर महानगर पालिका में 151 पार्षदों में से भाजपा के पास 108 वोट है. जबकि जिला परिषद की 58 सीटों में से भाजपा के पास केवल 15 सीटें ही है. विशेषत: नगर परिषद में भाजपा और कांग्रेस की बराबरी के वोट होने से दोनों दलों में टसल देखी जा रही है.