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नागपुर. इंग्लैंड से लौटे कोरोना बाधित नंदनवन के 28 वर्षीय युवक की हालत तो फिलहाल ठीक है, लेकिन पुणे की राष्ट्रीय विषाणु प्रयोगशाला से जिनेटिक सिक्वेंसिंग की रिपोर्ट अब तक नहीं आई है. शुक्रवार तक रिपोर्ट आने की उम्मीद है. अब तक युवक को मेडिकल से छुट्टी नहीं दी गई है. उक्त युवक महीनेभर पहले पुणे की एक कंपनी के काम के सिलसिले में इंग्लैंड गया था. 29 नवंबर को लौटने पर विमानतल पर जांच की गई. उसे होम आयसोलेशन में रहने की सलाह दी गई थी. लेकिन वह गोंदिया जाकर आया. 7 वें दिन तबीयत खराब होने पर जांच कराई. जांच में रिपोर्ट कोरोना पाजिटिव आई. इसके बाद परिजनों सहित गोंदिया में संपर्क में आने वालों की जांच की गई. उसे 23 दिसंबर को मेडिकल में भर्ती किया गया.

कोरोना के नये स्ट्रेन के मद्देनजर उसके नमूने जांच के लिए पुणे भेज दिये गये. हालांकि युवक की दूसरी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई है. इस हालत में नये स्ट्रेन की संभावना कम ही लग रही है. लेकिन जब तक पुणे से रिपोर्ट नहीं आ जाती, डाक्टर भी चैन की सांस नहीं लेगे. युवक की सिटी स्कैन सहित अन्य जांच भी की गई है. डाक्टरों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि पुणे में ब्रिटेन से लौटे 2 लोगों में नये स्ट्रेन पाया गया है.

70 फीसदी तेजी से फैलता है संक्रमण

डाक्टरों की माने तो भले ही नया स्ट्रेन ज्यादा घातक नहीं है, लेकिन इसके संक्रमण की क्षमता 70 फीसदी है. यानी यह स्ट्रेन कोरोना संक्रमण से भी अधिक तेजी से फैलता है. संपर्क में आने वाले केवल 10 ही नहीं बल्कि अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है. फिलहाल मेडिकल में नये स्ट्रेन की संभावना वाले 5 मरीज भर्ती है. सभी की रिपोर्ट की प्रतीक्षा की जा रही है. बुधवार तक देशभर में 20 से अधिक नये स्ट्रेन के मरीज पाये गये है,उसको देखते हुए सतर्कता को बढ़ाया जा रहा है. पुणे में 2 लोगों में संक्रमण बढ़ने से चिंता भी बढ़ गई है. इस बीमारी में भी कोरोना जैसी ही लक्षण पाये जा रहे हैं. लेकिन संक्रमण की रफ्तार तेज होने से सतर्कता बेहद जरुरी हो गई है. 

4 से ही शुरू होगे स्कूल

इस बीच मुंबई में जनवरी से पहले सप्ताह से शुरू होने वाले स्कूलों को अब 15 जनवरी से खोले जाने का निर्णय लिया गया है. यह फैसला नये स्ट्रेन के मद्देनजर ही लिया गया है. जबकि आरेंज सिटी में 4 जनवरी से स्कूल शुरू होने जा रही है. इसके लिए शिक्षकों सहित शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को 2 जनवरी तक कोविड रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है. हालांकि प्रशासन ने स्कूलें खोलने का तो निर्णय ले लिया है,लेकिन अब भी पालकों में ‘डर’ बना हुआ है. पालकों को लग रहा है कि ठंड के दिन होने और बच्चों के एकसाथ मिलने से अन्य संक्रमण भी फैल सकता है. यही वजह है कि अब भी कई पालक बच्चों को स्कूल भेजने पर पक्का मन नहीं बना सके है.