Uttar Pradesh Police got a big success in the murder of Kho-Kho player in Bijnor, one arrested
File Photo

    नागपुर. ‘अल्ला मेहरबान तो गधा पहलवान’ बड़ी पुरानी कहावत है लेकिन इन दिनों शहर पुलिस की कार्यप्रणाली ने इस कहावत को बदलकर ‘पुलिस मेहरबान तो ठग पहलवान’ कर दिया है. अब ऐसे सवाल उठना भी लाजमी है क्योंकि व्यवस्था ही कुछ ऐसी है कि ठग लोगों को लाखों करोड़ों रुपयों का चूना लगाकर बाहर छाती तान कर घूम रहे है.

    इतना ही नहीं माधव पवार की हत्या का मामला तो वाकई में चौकाने वाला है. माधव की हत्या का मुख्य आरोपी निषेध वासनिक इथेरियम ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगाकर फरार हो गया. पुलिस ने अप्रैल महीने में निषेध और उसकी गैंग के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विविध धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था. कुछ लोगों को गिरफ्तार कर खानापूर्ति कर दी और निषेध पुलिस से बचकर आज भी घूम रहा है.

    विगत 11 सितंबर को उसने अपने साथी गजानन मुंगने के साथ मिलकर माधव पवार का अपहरण किया. उसे गाड़ी में वाशिम ले जाया गया. वहां जाकर निषेध ने अपनी पिस्तौल से 3 गोली मारकर माधव की हत्या कर दी और दोबारा फरार हो गया. एक ठग जो प्रकरण में फरार रहता है. पुलिस को भनक तक नहीं लगती और वह शहर में आकर एक व्यक्ति का अपहरण कर ले जाता है. गोलियों से भूनकर उसकी हत्या करता और दोबारा फरार हो जाता है.

    इससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है. निषेध इसके पहले भी कन्हान में सोमकुंवर नामक व्यक्ति की हत्या कर चुका है. जल्द पुलिस के हाथ नहीं लगा तो आगे और भी लोगों को नुकसान पहुंचा सकता है. क्राइम ब्रांच की आर्थिक अपराध शाखा ने शुरुआत से ही इस प्रकरण को गंभीरता से नहीं लिया वरना इतनी बड़ी वारदात ही नहीं होती. 

    बंसोड़ कब होगा गिरफ्तार

    मत्स्य पालन व्यवसाय के नाम पर कम से कम 30 करोड़ रुपये की ठगी करने वाला फार्च्युन एक्वा और विजन फिशरीज का संचालक राजेश बंसोड़ भी ऐसा ही ठग है जो लोगों को चूना लगाकर खुलेआम घूम रहा है. उसने जमानत के लिए न्यायालय में अर्जी दायर की थी. इस पर फैसला होने तक पुलिस बंसोड़ को गिरफ्तार नहीं कर सकती थी लेकिन 2 दिन पहले सत्र न्यायालय ने उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी. इस मामले में उसका पीए भी आरोपी है. उसकी भी याचिका खारिज हो चुकी है. बावजूद इसके बंसोड़ बाहर घूम रहा है.

    बंसोड़ पर शिकंजा कसने में पुलिस ने देरी की. यदि समय रहते उनकी शिकायत पर मामले की जांच की जाती तो एफआईआर के साथ ही उसकी गिरफ्तारी हो सकती थी लेकिन बंसोड़ बहुत बड़ा सेटिंगबाज है. पुलिस अब भी प्रकरण को गंभीरता से नहीं ले रही है. दिल्ली के निवेशकों का भी कम से 10 करोड़ रुपया डूबा है वो लोग पहले ही पुलिस से ऑनलाइन शिकायत कर चुके है.  निवेशकों का कहना है कि अब तक तो उसने सारी रकम ठिकाने लगा दी होगी. 

    तिवारी को भी नहीं मिली बेल

    हिंगना रोड के गोलछा हाउसिंग एंड लैंड इंफ्रास्ट्रक्चर बिल्डर के यहां काम करने वाली कोतवालनगर निवासी रजनी पांडे ने फ्लैट और दूकानों के नाम पर ग्राहकों से मोटी रकम ली. बाद में कंपनी के संचालकों ने हाथ खड़े कर दिए और लोगों को बताया कि रजनी ने रकम कंपनी के खाते में जमा करने की बजाए खुद गबन कर ली. यह राशि उसने अपने भाई हरीश तिवारी के खाते में जमा करवा दी थी. काफी मेहनत और चक्कर काटने के बाद एमआईडीसी पुलिस ने रजनी और हरीश तिवारी के खिलाफ मामला दर्ज किया.

    हरीश की बेल अर्जी रद्द हो गई है. मामला दर्ज होने के बाद रजनी बयान देने 1 बार पुलिस स्टेशन आई थी. उसके बाद से रजनी भी फरार है. शिकायतकर्ता कुणाल देशोत्तर ने बताया कि केवल उनसे ही नहीं और भी कई लोगों से पैसा लिया गया. कंपनी ने भी रजनी के खिलाफ सीताबर्डी पुलिस से शिकायत की थी लेकिन वह मामला भी हवा-हवाई था. रजनी और हरीश खुलेआम घूम रहे है और निवेशक थाने व कचहरी के चक्कर काट रहे है.