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    नागपुर. देश की 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों तथा केंद्र, राज्य बैंक, बीमा, संगठित, असंगठित क्षेत्र के अखिल भारतीय स्वतंत्र फेडरेशन से जुड़े श्रमिक, कर्मचारियों ने 28 और 29 मार्च को केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ बंद की अपील की है.  संगठन के नेताओं का कहना है कि ‘न्यू इंडिया’ के नाम पर बैंक, बीमा, रक्षा, कोयला, ऊर्जा, रेल, सड़क आदि सभी महत्वपूर्ण क्षेत्र को एक-एक कर बेचा जा रहा है. पूंजीपतियों के हाथों नीलाम किया जा रहा है. श्रमिकों में इसे लेकर काफी रोष है और सभी एक मंच पर आकर इसका विरोध करेंगे. 

    नागपुर डिवीजन लाइफ इंश्योरेंस कॉरपोरेशन एम्पलाइज यूनियन के अध्यक्ष अनिल देशपांडे, सचिव नरेश अडचुले ने कहा कि सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण तथा बैंक कानून संशोधन विधेयक 2021 के विरोध में  हड़ताल की जा रही है. संगठनों का कहना है कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण मजदूर, किसान, युवा, महिला और समाज के प्रत्येक तबके का जीना मुश्किल हो गया है और आगे और भी स्थिति खराब होने की संभावना दिखाई दे रही है. 

    श्रमिक नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार ‘सेल इंडिया’ की नीति पर चल रही है जिससे आमदनी में काफी कमी आ रही है. न्यूनतम आय अर्जित करना भी सर्वसाधरण लोगों के लिए मुश्किल हो गया है. भूख सूचकांक में भारत 107 देशों में 104वें स्थान पर आ गया है. इससे पूरी तस्वीर साफ हो जाती है. 

    कई बार बदली तारीख

    इस बार बंद का आह्वान तो किया गया है लेकिन इसके पूर्व भी कई बार तारीख की घोषणा हुई और ऐन वक्त पर आंदोलन स्थगित कर दिया गया. इस बार हड़ताल होती है या फिर पुन: नई तारीख का ऐलान होता है यह देखने वाली बात होगी. बार-बार तारीख देने और स्थगित होने से कर्मचारियों के साथ-साथ जनता भी परेशान हो रही है.

    NOBW शामिल नहीं

    सरकारी बैंकों के संगठनों द्वारा 28 व 29 मार्च को 2 दिनों की हड़ताल घोषित की है लेकिन सार्वजनिक क्षेत्रों की बैंकों की भारतीय मंजदूर संघ प्रणित नेशनल आर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स संगठन (एनओबीडब्ल्यू) इस हड़ताल में शामिल नहीं होगा. संगठन का मानना है कि हड़ताल केवल राजनीतिक हेतु से प्रेरित है इसलिए एनओबीडब्ल्यू इसमें शामिल नहीं होगा.

    यह जानकारी विदर्भ बैक एम्प्लॉइज फेडरेशन के संगठन मंत्री सुरेश चौधरी, स्टेट बँक वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन के अध्यक्ष अरविंद भुमरालकर, मनोज होकम, अमित ढोणे, अर्चना सोहनी, विघ्नेश पाध्ये व अन्य एनओबीडब्ल्यू के सभी संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा दी गई.