Farmers demand immediate compensation for crop loss

    नाशिक : गुलाब चक्रीवात (Rose Cyclone) और तीन दिनों तक हुई अतिवृष्टी से जिले में 1 लाख 71 हजार हेक्टेयर पर होने वाली फसल बर्बाद (Crop Destruction) होने की बात पंचनामा (Panchnama) के बाद स्पष्ट हो गई है। इसके चलते जिले के 2 लाख 24 हजार 919 किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें मुआवजा देने के लिए जिला प्रशासन ने 147 करोड़ 21 लाख रुपए की मांग सरकार से प्रस्ताव के माध्यम से की है।

    गौरतलब है कि तीन दिनों तक हुई अतिवृष्टी से नाशिक जिले में हाहाकार मचाया। मालेगांव, मनमाड में दो बार बाढ़ आई। सोयाबीन, प्याज, बाजरी, मक्का, चावल आदि फसल बर्बाद हुई।  इसके चलते एक बार फिर किसान संकट में फंस गया। इस नुकसान के भयावह आकड़े सामने आए है। जिले में 1 लाख 71 हजार हेक्टेयर पर होने वाली फसल बर्बाद होने की बात पंचनामा के बाद स्पष्ट हो गई है। इन नुकसान के रूप में जिरायती फसल के लिए मदद के रूप में 8957.01 लाख रुपए की मांग की गई है।

    बागायत फसल के लिए 4367.98 लाख रुपए की मांग की गई है। वार्षिक फल फसल के लिए 18.35 लाख, बहुवार्षिक फल फसल के लिए 1377.99 लाख ऐसे कुल 147 करोड़ 21 लाख रुपए की मदद मांगी गई है। नांदगाव-मालेगांव में बारिश से प्याज का नुकसान हुआ। फलबागान का नुकसान हुआ। अंगूर और अनार बाग उद्धवस्त हो गए। अनेक मकानों का छत उड़ गया। तो कई मकान गिर गए। नाशिक जिले के नांदगाव तहसील सूखा के रूप में पहचाना जाता है। यहां पर 12 सालों के बाद पहली बार रिकॉर्ड ब्रेक बारिश हुई। 12 घंटे में 121 मिमी बारिश दर्ज की गई।  इस बारिश के चलते किसान एक बार फिर संकट में फंस गया है।

    जल से लबालब हुए बांध

    नाशिक शहर को जलापूर्ति करने वाले गंगापुर बांध जलमय हो गया है। गंगापुर बांध समूह में गंगापुर (बड़ा), काश्यपी (मध्यम), गौतमी गौदावरी (मध्यम) और आलंदी (मध्यम) ऐसे 4 बांध है। इसमें से सभी बांध जलमय हो गए है। जिसके चलते इस साल नाशिकवासीयों को पीने के पानी की चिंता करने की जरूरत नहीं है। दूसरी ओर मुंबई को जलापूर्ति करने वाले इगतपुरी तहसील का सबसे बड़ा अप्पर वैतरणा बांध भी जलमय हो गया है। जिसके चलते मुंबईवासीयों की पानी समस्या हल हो गई है। वैतरणा बांध पिछले साल अगस्त माह में जलमय हो गया था। इस साल उसे जलमय होने के लिए एक माह की देरी हुई।

    19 और 20 को हो सकती है बारिश

    मॉनसून मध्य और दक्षिण भारत में और कुछ दिन सक्रिय रहेगा। इसलिए उत्तर महाराष्ट्र में एक बार फिर 19 और 20 अक्टूबर को जोरदार बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है। 25 अक्टूबर के बाद बारिश कम होगी। नाशिक जिले में बारिश सत्र की शुरुआत में बारिश नहीं हुई।  जिसके चलते लगभग सभी बांध सूख गए। किसानों के सामने जल संकट निर्माण हुआ। परंतु सितंबर माह में झमाझम बारिश हुई। मनमाड, नांदगाव में दो बार अतिवृष्टी हुई। इस साल नाशिक में गोदावरी नदी में दो बार बाढ़ आई।