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    नाशिक. पदोन्नति की प्रक्रिया (Promotion Process) गलत तरीके से करने का दावा श्रेणी तीन के कर्मचारियों द्वारा करने के बाद जिला के आरोग्य विभाग एक बार फिर चर्चा में आ गया है।  साथ ही ज्येष्ठता में पात्र होने के बाद भी 14 कर्मचारियों पर अन्याय करते हुए कनिष्ठ कर्मचारियों को पदोन्नति देने का षडयंत्र रचा गया है। जिसके चलते कर्मचारियों में असंतोष बढ़ गया है। 

    इस पदोन्नति के केंद्र स्थान होने वाले आरोग्य उपसंचालक डॉ.  पी. डी.  गांडाल की समस्या बढ़ गई है।आज की स्थिति में विविध सरकारी विभाग में तबादले की प्रक्रिया शुरू है, जिसमें आरोग्य विभाग भी शामिल है। आरोग्य सेवा नाशिक मंडल के उप संचालकों ने 29 और 30 सितंबर को अधिकारी-कर्मचारियों के तबादलों के आदेश जारी किए। कुछ कर्मचारियों को कनिष्ठ लिपिक संवर्ग से वरिष्ठ लिपिक संवर्ग तो कुछ वरिष्ठ लिपिक संवर्ग से सहायक अधीक्षक संवर्ग तो कुछ कर्मचारियों को सहायक अधीक्षक संवर्ग से अधीक्षक संवर्ग में पदोन्नती दी गई। 

    काउंसिलिंग प्रक्रिया कार्यान्वित की गई

    नाशिक मंडल में कार्यान्वित की गई पदोन्नति प्रक्रिया में गड़बड़ी होने का आरोप आरोग्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी कर रहे है। अन्य कुछ जगह पर आरोग्य कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया में  काउंसिलिंग प्रक्रिया कार्यान्वित की गई। परंतु नाशिक मंडल में काउंसिलिंग प्रक्रिया कार्यान्वित न करते हुए पदस्थापना करने का दावा किया गया है। विभागीय पदोन्नति समिति की 29 सितंबर को हुई बैठक अवैध घोषित कर पदोन्नति की प्रक्रिया रद्द करें और दोबारा चयन प्रक्रिया कार्यान्वित करने की मांग अधिकारी-कर्मचारी कर रहे है। विशेष यह है कि पदोन्नति हुए कर्मचारियों के पदोन्नति के आदेश प्रत्यक्ष आदेश के निर्गमित तारिख को आरोग्य संस्था में रिक्त पद न होने के बाद भी नियत उम्र के चलते निवृत्त होने वाले कर्मचारियों के पद दिखाने से आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है।  यह पदस्थापना किस सरकारी निर्णय और नियम के तहत की गई? ऐसा सवाल भी उपस्थित किया गया है।  आरोग्य सेवा आयुक्तालय के उप संचालक दर्जा या उस पर होने वाले अधिकारियों का 15 दिनों में समिति गठीत कर जांच करने की मांग करने से उपसंचालक पी. डी.  गांडाल की समस्या बढ़ गई है। 

    आर्थिक व्यवहार की संभावना

    समुपदेशन प्रक्रिया कार्यान्वित न करते हुए दी गई पदोन्नति, तबादलों का कारण आदि को लेकर आरोग्य विभाग में अलग अलग चर्चा शुरू हो गई है, जिसमें बड़े तौर पर आर्थिक व्यवहार के लिए समुपदेशन प्रक्रिया कार्यान्वित न करने की संभावना आम आदमी पार्टी ने व्यक्त की है।  वरिष्ठ पात्र कर्मचारियों के बजाए गलत तरिके से कर्मचारी पात्र निश्चित कर अपात्र कर्मचारियों को पदोन्नति के लिए चयन करने का काम किया गया है।  इसके चलते विभागीय पदोन्नति समिति के सदस्यों की जांच कर कार्रवाई करने की मांग आप के प्रदेश प्रवक्ता जितेंद्र भावे ने की।