महानगरपालिका प्रशासन हटाएगी नालों पर होने वाला अतिक्रमण, पहले चरण का सर्वेक्षण हुआ पूर्ण

    नाशिक. शहर (City) के बिल्डरों (Builders) ने नैसर्गिक नालों (Natural Drains) पर किए गए अतिक्रमण (Encroachment) को लेकर महानगरपालिका कमिश्नर (Municipal Commissioner) कैलास जाधव (Kailas Jadhav) ने दिए आदेश के बाद शहर के 68 में से प्रमुख 22 नालों का सर्वेक्षण नगर रचना विभाग ने पूर्ण किया गया है। इस सर्वेक्षण रिपोर्ट की छानबीन शुरू हो गई है।  पहले चरण में सिडको के दत्त चौक व्हाया गोविंद नगर मार्ग नासर्डी नदी तक नैसर्गिक नालों पर होने वाला अतिक्रमण निकालने के निर्देश कमिश्नर कैलास जाधव ने दिए। अगले सप्ताह में सीमांकन की मुहिम नगर रचना विभाग शुरू करने वाला है।

    नाला चौड़ीकरण कामकाज की रफ्तार बढ़ाई जाएगी। शहर में गोदावरी नदी सहित नासर्डी, वालदेवी उप नदी है। शहर के विविध क्षेत्र से गोदावरी सहित उसकी उप नदी को लगभग 68 छोटे-बड़े नैसर्गिक नाले मिलते है। परंतु इस प्रमुख नदी सहित नालों पर पिछले कई सालों से बड़े तौर पर अतिक्रमण हुआ है।  कई जगह पर बिल्डरों ने निर्माण प्रकल्प के लिए नाला का प्रवाह बदल दिया है।  तो कुछ जगह पर नालों में मिट्टी डालकर उसे बंद किया  गया है।  इसके चलते गोदावरी सहित उसकी उप नदीयों को बाढ़ आने के बाद नालों का पानी सीधे नागरी वसाहत में पहुंच रहा है। महासभा, स्थायी समिति सहित प्रभाग समिति की बैठकों में नालों पर होने वाले अतिक्रमण को लेकर कई बार अवाज बुलंद की गई है।  पूर्व विधायक नितीन भोसले ने नालों पर किए गए अतिक्रमण को लेकर ठिया आंदोलन किया था।  इसके बाद नगरसेवकों सहित आम नागरिकों द्वारा की जा रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए महानगरपालिका कमिश्नर कैलास जाधव ने नालों का सर्वेक्षण करने के आदेश दिए। कमिश्नर की उपस्थिती में हुए पहली बैठक में सिडको के दत्त नगर, आर्यवर्त, सदगुरू नगर, गोविंदनगर मार्ग नासर्डी नदी को मिलने वाले नालों का अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया गया है। 

    22 जगह पर अतिक्रमण

    सिडको के दत्त चौक से नासर्डी नदी को मिलने वाले नालों पर 22 जगह पर बड़े तौर पर अतिक्रमण किया गया है।  निर्माण कार्य बढ़ने के साथ सुरक्षा दिवार का निर्माण कर अतिक्रमण किया गया है।  पहले 8 से 10 फिट होने वाले नाले अब 4 फिट हो गए है।  विशेष यह है कि कई जगह पर तो ले-आऊट धारकों ने सुरक्षा दिवार बनाकर नालों पर अतिक्रमण करने के बाद भी महानगरपालिका के नगर रचना और निर्माण विभाग ने इस ओर ध्यान न देने की बात सामने आई है। 

    संबंधितों पर दर्ज होगा फौजदारी मामला

    नैसर्गिक नालों को मिटाकर उस पर इमारत खड़ी होने से बारिश के पानी का निचरा होने के लिए जगह शेष नहीं है। इसलिए नैसर्गिक नालों को मिटाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भूमिका महानगरपालिका कमिश्नर जाधव ने अपनाई है। अतिक्रमण हटाने के साथ संबंधितों पर फौजदारी मामला दर्ज करने के निर्देश दिए गए है। अब महानगरपालिका प्रशासन कितने नालों पर होने वाले अतिक्रमण को हटाकर संबंधितों पर क्या कार्रवाई करती है? इस ओर सभी की निगाहें लगी हुई है।