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    नाशिक : नाशिक (Nashik) में महानगरपालिका चुनाव (Municipal Elections) की तैयारी जोरशोर से चल रही है, लेकिन ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) के मुद्दे को देखते हुए लगता है कि यह चुनाव तय समय पर नहीं हो पाएगा। इसमें करीब एक महीने की देरी हो सकती है।

    दरअसल ओबीसी आरक्षरण के मुद्दे को लेकर सरकार (Government) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में याचिका दायर की है। इस याचिका पर सुनवाई और जब तक फैसला नहीं आ जाता महानगरपालिका चुनाव के तारीखों के घोषणा संभव नहीं है। ऐसे में नाशिक महानगरपालिका का चुनाव फरवरी के दूसरे सप्ताह के बजाय  मार्च महीने में होने की जानकारी सूत्रों से मिल रही है। अगले साल राज्य की 22 महानगरपालिका का चुनाव होना है। बढ़ी हुई जनसंख्या को देखते हुए 11 नगरसेवकों (Corporators) की संख्या बढ़ा दी गई है।

    कोर्ट से मामले के निपटारे के बाद राज्य सरकार द्वारा चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्ताव रखा जाएगा। चुनाव आयोग इस प्रस्ताव पर क्या निर्णय लेती है इसका फिलहाल अनुमान नहीं लगाया जा सकता है।  17 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के बाद ही कुछ साफ हो पाएगा। सुप्रीम कोर्ट जो फैसला सुनाएगी उस पर चुनाव का भविष्य टिका है। लेकिन अगर कोर्ट ने तय समय में चुनाव कराने का निर्देश दिया तो भी चुनाव में एक महीने की देरी होगी।

    नाशिक महानगरपालिका का चुनाव दूसरे फेज में

    अगले वर्ष राज्य के 22 महानगरपालिका का चुनाव होगा, लेकिन एक ही वक्त में सभी महानगरपालिका का चुनाव नहीं होगा। पहले फेज में चुनाव के लिए इंतजार में बैठी  महानगरपालिका का चुनाव होगा। पहले फेज में नवी मुंबई, कोल्हापुर, वसई-विरार, कल्याण – डोंबिवली महानगरपालिका का चुनाव होगा। पहले फेज का चुनाव फरवरी महीने में होगा जबकि दूसरे फेज का चुनाव मार्च के आखिर तक होगा। दोनों फेज के चुनाव के बीच 45 दिनों का अंतर होगा। नाशिक महानगरपालिका का चुनाव दूसरे फेज में होगा।