nashik muni ele

    नाशिक रोड:  आगामी नाशिक महानगरपालिका चुनाव (Nashik Municipal Corporation Elections) को लेकर नाशिक रोड परिसर के 6 प्रभागों के इच्छुकों ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां (Political Activities) तेज कर दी है। प्रभाग रचना घोषित नहीं हुई है, इसलिए आज की स्थिति में सभी राजनीतिक दलों के इच्छुकों ने वेट एंड वॉच की भूमिका अपनाई है। कनेक्टिविटी (Connectivity) बरकरार रखने के लिए नाशिक रोड के इच्छुक उम्मीदवार (Candidates) अलग-अलग फंड़ों का उपयोग कर रहे है। कुल मिलाकर सभी राजनीतिक दलों के इच्छुक चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं। 

    नाशिक रोड परिसर शुरुआत से ही शिवसेना का गढ़ रहा है, परंतु पिछले महानगरपालिका के पंचवर्षीय चुनाव में भाजपा ने शिवसेना को जोरदार टक्कर देते हुए 23 में से सर्वाधिक 12 सीट पर शानदार जीत दर्ज करते हुए नाशिक रोड विभाग में एक नंबर का राजनीतिक दल बन गया। आज की स्थिति में शिवसेना और भाजपा इन दो प्रतिस्पर्धी दल के इच्छुकों की संख्या अधिक है। इसके बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और मनसे में इच्छुकों की संख्या देखने को मिल रही है। आरक्षित प्रभाग में आरपीआई आठवले गट सक्रिय है। जेलरोड, भीमनगर परिसर में कवाडे गट का दबदबा है। नाशिकरोड को शिवसेना की नयना घोलप के माध्यम से महापौर पद मिला था। इसके बाद उपमहापौर पद पर आज तक नाशिक रोड के बाबा सदाफुले और रंजना बोराडे ने काम किया है। इसलिए नाशिक रोड को एक बार फिर महापौर पद का अवसर मिलने के लिए भाजपा-शिवसेना के इच्छुक प्रयासारत है।

    युवा आघाड़ी पर निर्भर है मनसे की जीत

    नाशिक रोड परिसर में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना की जीत युवा आघाड़ी पर निर्भर है। महानगरपालिका के पिछले पंचवार्षिक चुनाव में 5 नगरसेवक चुनकर आए थे, लेकिन वह अन्य राजनीतिक दल में प्रवेश किया। इसलिए नाशिक रोड में मनसे के कार्यकर्ताओं की संख्या बहुत ही कम है। युवा कार्यकर्ता श्याम गोहाड, किशोर जाचक, बंटी कोरडे, नितीन धनापुने, विक्रम कदम, साहबराव खर्जुल आदि मनसे के अस्तित्व को बरकरार रखने के लिए संघर्ष करते हुए हरसंभव प्रयास कर रहे है। इसलिए मनसे ने भाजपा के साथ युति की तो मनसे के इच्छुकों के हौसले बुलंद होंगे।

    एनसीपी ने फुंका बिगुल

    नगरसेवक जगदीश पवार के माध्यम से एनसीपी को प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला। आज की स्थिति में नाशिक रोड में एनसीपी का दबदबा बड़े तौर पर बढ़ने में मदद मिल रही है। सत्ता के इर्द-गिर्द इच्छुक केंद्रित हो रहे हैं, इसलिए नाशिक रोड में भुजबल का होल्ड दिखने लगा है, जिसका इफेक्ट चुनाव में देखने को मिलेगा। किसान आंदोलन के बाद पार्टी के छोटे-बड़े कार्यक्रमों को कार्यकर्ताओं की संख्या बढ़ गई है। पार्टी ने जोरदार कैम्पेनिंग की शुरुआत की है। देवलाली विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की विधायक सरोज अहिरे महानगरपालिका सीमा क्षेत्र में जोरदार काम कर रही हैं।

    विधायक-पूर्व विधायक में होगा संघर्ष

    पिछले 30 सालों से देवलाली विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में शिवसेना का कब्जा था। ढाई वर्ष पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कब्जे में होने से पूर्व समाज कल्याणमंत्री बबन घोलप और पूर्व विधायक योगेश घोलप के खिलाफ विधायक सरोज अहिरे में संघर्ष देखने को मिलेगा। महाविकास आघाड़ी पैटर्न के तहत टिकट वितरण हुआ तो पूर्व विधायकों के साथ प्रचार करना होगा। टिकट वितरण को लेकर जमकर विवाद होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। पिछली बार घोलप परिवार को दो टिकट मिलने से मतदाताओं ने तनुजा और नयना घोलप को हार का स्वाद चखाया। इसलिए इस बार घोलप परिवार के सदस्य महानगरपालिका के चुनाव मैदान में उतरते है या नहीं? इस ओर सभी की निगाहें लगी हुई है।

    वेट एंड वॉच

    महानगरपालिका के आगामी पंचवार्षिक चुनाव में भाजपा और शिवसेना को सर्वाधिक प्रसंशा मिलने से इन दो दलों के पास सबसे अधिक इच्छुक हैं। प्रभाग रचना घोषित न होने से इच्छुक ‘वेट एंड वॉच’ की भूमिका में हैं। प्रभाग रचना घोषित होने के बाद पार्टी प्रवेश का सिलसिला शुरू होगा। इसके पहले इच्छुक अपना प्रभाव क्षेत्र तैयार करने में जुट गए हैं।

    कनेक्टिविटी के अजीबो-गरीब फंडे

    आज की स्थिति में इच्छुक उम्मीदवार और विद्यमान नगरसेवक मतदाताओं से कनेक्टिविटी रखने के लिए अजीबो-गरीब फंड़ों का उपयोग कर रहे हैं, जिसमें मिसल पार्टी, क्रिकेट मैच, जन्मदिवस, विकास कार्य का उद्‌घाटन का इवेंट, सोशल मीडिया पर शुभकामनाओं का संदेश, अलग-अलग मित्र मंडलों को भोजन पार्टी, होर्डिंग, 10वीं-12वीं के गुणवंत छात्रों का सम्मान आदि शामिल है। इसके चलते मतदाताओं के अच्छे दिन शुरू हो गए हैं।