जलाशयों में लबालब पानी, घरों में किल्लत

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    नाशिक : जिले के शहरी (Urban) और ग्रामीण क्षेत्रों (Rural Areas) में जुलाई और अगस्त महीने की अब तक कालावधि में मानसून की बहुत अच्छी बरसात हुई है। भारी बरसात के कारण जिले के सभी जलाशयों (Reservoirs) में लबालब पानी भर गया है। सभी जलाशयों में जल भंडारण की स्थिति बहुत ही अच्छी है। यहां तक गोदावरी समेत जिले के अन्य सभी सहायक नदियों में भी बाढ़ जैसी स्थिति देखी जा रही है, लेकिन इस सब के विपरीत घरों में पाने का पानी न होने से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

    जिले के लगभग सभी गांवों में लगभग एक जैसी तस्वीर देखने को मिल रही है। यह गांव में महिलाएं पानी के लिए हंडा लेकर घूम रही हैं। गंगापुर बांध गांव से कुछ ही दूरी पर है और नाशिक महानगरपालिका की हद में आने वाले सातपुर के पास पिंपलगांव बुहला के निवासी प्यासे हैं, इसलिए अंतत: गुस्साई महिलाओं ने गांव में हंगामा किया। 

    कुछ क्षेत्रों में पीने के पानी की आपूर्ति नहीं थी

    पिंपलगांव बुहला के ग्रामीणों के लिए पानी की समस्या एक स्थायी मुद्दा बन गया है। यहां की महिलाओं से कई बार पेयजल के लिए आंदोलन किया है, वे सड़कों पर उतरी हैं, लेकिन आश्वासन के अलावा उन्हें कुछ नहीं मिला है। गांव में रविवार को गांव कम दबाव के साथ पानी आया, वहीं कुछ इलाकों में तो पेयजल आपूर्ति हुई ही नहीं। सिर पर हंडा रखकर लंबा फासला तय करना गांव की महिलाओं की दिनचर्या बन गई है। मूलभूत सुविधा में गिने जाने पानी और बिजली की समस्या यहां के लोगों के जीवन का हिस्सा बन गया है।    

    न बिजली है और न पानी है, जीये तो जीये कैसे

    नगरसेविका इंदुबाई नागरे ने कुछ महीने पूर्व पिंपलगांव बहुला माले संभाग में पेयजल पाइप लाइन कार्य का उद्घाटन किया था, लेकिन उसके बाद भी महिलाओं ने यह आरोप लगाते हुए पाइप लाइन का उद्घाटन तो जरूर हुआ है लेकिन पानी अभी तक नदारद है। क्षेत्र में पानी का मुद्दा जस का तस बना हुआ है। देश में स्वतंत्रता के 75 वे वर्ष के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। हर घर तिरंगा फहराने के लिए जनता से अपील की जा रही है, ऐसे में महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य के कई जिलों की ग्रामीण जनता पेयजल के लिए परेशान है। न तो अच्छे रास्ते हैं, न बिजली है और पानी है, ऐसे में गांव के लोग कहे हैं कि जिए तो जिए कैसे।