Ganesh Naik

    मुंबई: नवी मुंबई पुलिस ने शुक्रवार को बंबई उच्च न्यायालय को सूचित किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक गणेश नाइक के खिलाफ दायर दुष्कर्म के मामले में वह किसी सबूत का पता नहीं लगा सकी। पुलिस ने स्थानीय अदालत में एक ‘सारांश (समरी)’ रिपोर्ट भी सौंपी है। 

    ‘सारांश’ रिपोर्ट ऐसे मामलों में दायर की जाती है जहां अपराध तो हुआ होता है, लेकिन सबूत का पता नहीं लग पाता या आरोपी व्यक्ति नहीं मिल पाता। इस साल अप्रैल में एक 42 वर्षीय महिला ने नाइक के खिलाफ मामला दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उन्होंने उससे दुष्कर्म करने के अलावा उसे धमकी दी। 

    शिकायत के मुताबिक महिला और नाइक वर्ष 1995 तक लिव-इन रिश्ते में रहे और दोनों से एक बच्चा भी है। शिकायत के खिलाफ नाइक ने गत मई में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर अग्रिम जमानत हासिल की।  न्यायमूर्ति रेवती मोहिते देरे और न्यायमूर्ति आरएन लढ्ढा की खंड पीठ के समक्ष जब शुक्रवार को विधायक की याचिका सुनवाई के लिए आई तो अतिरिक्त सरकारी वकील प्रजाक्त शिंदे ने कहा कि पुलिस ने इस साल सितंबर में ही इस मामले में एक ‘समरी’ रिपोर्ट सौंप दी थी।  

    नाइक के वकील अशोक मुंदरगी ने पीठ से अनुरोध किया कि वह स्थानीय अदालत को आदेश दे कि वह मामले का तेजी से निपटरा करे।  मुंदरगी ने कहा, ‘‘इस मामला राजनीतिक है और ऐसे मामले जानबूझकर लटकाए जाते हैं। पुलिस की ओर से रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अदालत ने शिकायतकर्ता को नोटिस भी जारी किया था, लेकिन इसके बाद से मामला लंबित है।” इस पर पीठ ने मजिस्ट्रेट अदालत को निर्देश दिया कि वह तीन महीने के अंदर मामले का निपटारा करे। (एजेंसी)