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    पुणे: राज्य में बिजली का उत्पादन (Electricity Production) जरुरत से अधिक हो रहा है, लेकिन महावितरण (Mahavitaran) द्वारा बिजली खरीदी का करार समय पर नहीं करने की वजह से लोडशेडिंग (Loadshedding) के संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह से किसानों (Farmers) को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। ऊर्जा मंत्री इसकी योजना बनाने में नाकाम रहे हैं। यह आरोप स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के नेता राजू शेट्टी (Raju Shetty) ने लगाया है।

    पुणे में राजू शेट्टी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि लाउडस्पीकर पर राजनीति करने की बजाए किसानों की मुश्किलों को समझने का प्रयास किया जाए। राज्य में बिजली तारों से करंट लगने और सर्पदंश की वजह से किसानों की मौत हो रही है, लेकिन सरकारी नियमों के कारण मदद नहीं मिल रही है। इसे लेकर स्वाभिमानी शेतकरी संगठन की तरफ से मानव अधिकारों का उल्लंघन होने को लेकर कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी। राज्य में अतिरिक्त गन्ने की समस्या पैदा होने की वजह से ढुलाई पर गन्ना उत्पादकों को सब्सिडी दी जाए। इस मौके पर किसान संगठन के नेता प्रकाश बालवडकर, बापूसाहेग कारंडे, अमर सिंह कदम,  दिनेश ललवाणी आदि उपस्थित थे।

    विधान परिषद सदस्य बनने में दिलचस्पी नहीं

    महाविकास आघाडी सरकार ने किसानों की जमीन को कब्जे में लेकर कौडी का मूल्य देने का निर्णय लिया। भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव से किसानों को होने वाले नुकसान को लेकर सोनिया गांधी, शरद पवार को पत्र लिखा है। दो महीने के बाद भी उनका जवाब नहीं आया। किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसलिए हम महाविकास आघाडी से बाहर आएंगे। अब राज्यपाल नियुक्त विधान परिषद सदस्य बनना मुझे नैतिक दृष्टि से उचित नहीं लग रहा है।

     न्यूनतम गारंटी मूल्य कानून बने

    किसानों की जमीन पर बने जलाशयों से साढ़े पांच हजार मेगावॉट बिजली का उत्पादन होता है और किसानों को पांच हजार मेगावॉट बिजली की जरुरत होती है। ऐसे में किसानों को हर दिन समान बिजली मिलनी चाहिए। इसी तरह से किसानों को समान वेतन कानून की तर्ज पर कृषि माल का न्यूनतम गारंटी मूल्य दिया जाए। इसे लेकर केंद्र सरकार कानून बनाए। इसके लिए देशभर में ग्राम सभा से प्रस्ताव पास कर राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे।