Chhath Puja

    पुणे/पिंपरी: आस्था का महापर्व छठ पूजा (Chhath Puja) की छटा सांस्कृतिक नगरी पुणे (Pune) और औद्योगिक नगरी पिंपरी (Pimpri) में दिखी। रोजी रोटी के लिए बिहार (Bihar) से यहां आ बसे पूर्वांचलियों ने परिवार सहित नदी के घाटों और तालाबों में बुधवार की शाम डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। गुरूवार सुबह उगते सूरज को अर्घ्य के साथ ही इस महापर्व का समापन हो जाएगा। 

    कारोना (Corona) के बावजूद लोगों की उत्सुकता कम नहीं हुई। हालांकि इस बार प्रशासन की ओर से कुछ खास व्यवस्था नहीं की गई थी। जिसका लोगों को मलाल रहा।

    घरों में भी छठ की धूम रही

    पुणे और पिंपरी में कई जगहों पर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के लोगों द्वारा धूमधाम से छठ का आयोजन किया गया। पुणे के नगर रोड स्थित वाघोली के वाघेश्वर मंदिर तालाब में सैकड़ों की संख्या में लोग इकट्ठा हुए और इस महापर्व को मनाया। वहीं पिंपरी के पवना नदी, इंद्रायणी नदी के घाटों पर लोग इस महापर्व को मनाने के लिए एकत्र हुए। पुणे के हड़पसर  इंडस्ट्रीज के  शिंदे वस्ती  कैनाल पर छट पूजा के लिए भीड़ दिखी। पानी में खड़ा हो कर महिलाओं ने  डूबते सूरज को अर्घ्य दिया। उसके पहले गन्ना,फल, मिठाई और ठेकुआ चढ़ाया। इसके अलावा कोरोना के चलते अधिकांश लोगों ने अपने-अपने घरों में ही पर्व को मनाना ही बेहतर समझा।

    पिंपरी के कई इलाकों में रहते हैं बिहार के लोग

    पिंपरी के निगडी, पुणे के कात्रज, चंदन नगर, वाघोली सहित कई इलाकों में बिहार से आए लोग भारी संख्या में रहते हैं। आस्था के इस पर्व की शुरूआत दिवाली के चौथे दिन यानी कि चतुर्थी से हो गई थी। 8 नवंबर से नहाय खाय से छठ पूजा की शुरुआत हुई। 9 नवंबर को खरना हुआ। तो 10 नवंबर की शाम को पहला अर्घ्य दिया गया। 11 नवंबर गुरुवार की सुबह उगते सूरज को अर्घ्य देने के साथ ही इस पर्व का समापन हो जाएगा।