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  • अंतिम दलीलें पेश करने 15 मार्च तक का समय

पुणे: कोरेगांव भीमा जांच आयोग ने 1 जनवरी 1818 को कोरेगांव भीमा की लड़ाई में पेशवा सेना के खिलाफ लड़ने वाले अपने सैनिकों की याद में ब्रिटिश सरकार द्वारा निर्मित युद्ध स्मारक ‘विजय स्तंभ’ के बारे में सेना का रुख जानने के लिए भारतीय सेना से संपर्क किया है। आयोग ने भारतीय सेना से ‘विजय स्तंभ’ पर आयोजित समारोहों के बारे में भी जानकारी मांगी है। राज्य सरकार ने 1 जनवरी, 2018 को कोरेगांव भीमा में हुई हिंसा की जांच के लिए सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जे. एन. पटेल की अध्यक्षता में दो सदस्यीय आयोग का गठन किया, हिंसा एक व्यक्ति की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।  

पक्ष रखने 15 मार्च तक का समय
आयोग के सचिव वी. वी. पलणीटकर ने कहा कि भारतीय सेना के अधिकारियों और वकील को एक अनुरोध पत्र जारी किया गया था। आयोग ब्रिटिश काल के युद्ध स्मारक विजय स्तंभ पर सेना का रुख जानना चाहता है। आयोग ने विजय स्तंभ पर भारतीय सेना द्वारा आयोजित समारोहों का विवरण भी मांगा है। पलणीटकर ने कहा कि कर्नल रैंक का एक अधिकारी और सेना का प्रतिनिधित्व करने वाले एक वकील, सोमवार को आयोग के सामने पेश हुए और अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा। उन्होंने बताया कि आयोग ने उनसे 15 मार्च तक उनका पक्ष आयोग के समक्ष पेश करने को कहा है। आयोग ने विभिन्न पक्षों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों द्वारा अंतिम दलीलें पेश करने के लिए समय 15 मार्च तक बढ़ा दिया है। 

ऐतिहासिक रिकॉर्ड
आयोग के समक्ष प्रस्तुत ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार, ‘विजय स्तंभ’ 1821 में ब्रिटिश सरकार द्वारा कोरेगांव भीमा की लड़ाई लड़ने वाले अपने सैनिकों की याद में बनवाया गया था।