School Bus Service
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    पुणे: पुणे (Pune) और पिंपरी-चिंचवड़ (Pimpri-Chinchwad) में स्कूलों (Schools) ने ऑफलाइन (Offline) कक्षाएं फिर से शुरू (Start) कर दी हैं, लेकिन स्कूल बस सेवा (School Bus Service) अभी भी पूरी तरह से शुरु नहीं हो सकी हैं। पहले लगभग 5,500 स्कूल बसें (School Buses) सड़कों पर चलती थी, लेकिन वर्तमान में शहर में केवल 3 प्रतिशत बसें ही शुरु हैं।

    मरम्मत कार्य, बीमा और बैंक बकाया का खर्च वहन करने में असमर्थ स्कूल बस मालिकों ने वाहनों की स्क्रैपिंग शुरू कर दी है। कुछ वाहनों को वित्त कंपनियों ने भी जब्त कर लिया है। स्थिति अभी भी अनिश्चित है, ड्राइवर और कार्यवाहक इन परिस्थितियों में काम करने को तैयार नहीं हैं। 

    महामारी में सबसे पहले बंद होने वाला उद्योग स्कूल बस

    पुणे जिला स्कूल बस एसोसिएशन के संयोजक सचिन पंचमुख ने बताया कि पिछले दो वर्षों से बसों का परिचालन बंद था, जिससे महामारी के दौरान यह सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि यह बंद होने वाला सबसे पहला और सबसे अंत में चालू होने वाला उद्योग था, वह भी पूरी क्षमता में नहीं। महामारी से पहले डीजल की कीमत 66 रुपये प्रति लीटर थी, लेकिन इसकी दर बढ़ाकर 94 रुपए कर दी गई है। इसके अलावा, बसें लंबे समय से बेकार पड़ी थीं। यहां तक कि अगर बस ओनर्स कुछ छात्रों के लिए संचालन फिर से शुरू करते हैं, तो भी वे हुए नुकसान की भरपाई नहीं कर पाएंगे। उन्होंने बताया कि स्कूल बसों का संचालन तभी शुरू किया जा सकता है, जब परिवहन शुल्क में 40 से 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो, लेकिन छात्रों के अभिभावक भुगतान करने को तैयार नहीं हैं।

    कर्मचारी काम करने को तैयार नहीं 

    सचिन पंचमुख 10 स्कूल बसों के बेड़े के मालिक हैं और पिछले 15 वर्षों से इस व्यवसाय में हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआती कुछ महीनों में उन्होंने ड्राइवरों और कार्यवाहकों के वेतन का भुगतान किया, लेकिन जैसे-जैसे लॉकडाउन बढ़ा, उनमें से अधिकांश अपने गृहनगर के लिए रवाना हो गए। इस असुरक्षा के कारण कोई भी काम करने को तैयार नहीं है।

    तत्काल समाधान की आवश्यकता

    पुणे बस और कार मालिक संघ की कार्यकारी अध्यक्ष और स्कूल बस समिति के एक टास्क फोर्स सदस्य किरण देसाई ने कहा कि स्थिति गंभीर है। सरकार को तत्काल छूट देने की आवश्यकता थी। गर्मी की छुट्टी में स्कूल बंद होने से बस मालिक असुरक्षित हैं। बस सुविधा माता-पिता और स्कूलों की प्रमुख आवश्यकता है। इसलिए तत्काल समाधान की आवश्यकता है, अन्यथा चीजें मुश्किल हो जाएंगी।