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    पिंपरी: महाविकास आघाड़ी सरकार (MVA Govt.) के तीन सदस्यीय प्रणाली से स्थानीय निकायों के चुनावों को पलटकर राज्य की शिंदे-फडणवीस सरकार (Shinde-Fadnavis Government) ने पुनः चार सदस्यीय प्रणाली से (मुंबई छोड़कर) चुनाव कराने का फ़ैसला किया है। साथ ही वार्ड और नगरसेवकों की संख्या को बढ़ाने का आदेश भी निरस्त कर दिया है। इसके ठीक दूसरे दिन राज्य चुनाव आयोग ने सभी महानगरपालिकाओं को आदेश जारी कर तीन सदस्यीय प्रणाली के हिसाब से की गई वार्ड संरचना और आरक्षण का ड्रा रद्द करने के आदेश दिए हैं। 

    चार सदस्यीय प्रणाली से चुनाव के लिए आग्रही और चुनाव आयोग से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक संघर्षरत रहे पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका के स्थायी समिति के पूर्व सभापति विलास मड़ीगेरी ने इस फैसले के लिए शिंदे- फडणवीस सरकार का आभार जताया है।

     महानगरपालिकाओं को आदेश जारी 

    मड़ीगेरी ने संवाददाताओं को बताया कि महानगरपालिका चुनाव प्रणाली और उच्च न्यायालय से लेकर उच्चतम न्यायालय तक हमने राज्य में तत्कालीन महाविकास आघाड़ी सरकार के दबाव में और गलत तरीके से चुनाव प्रणाली द्वारा की गई प्रक्रिया के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। हमारे अनुरोध के अनुसार और सुप्रीम कोर्ट के साक्ष्य के अनुसार, हाल ही में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सरकार ने वार्ड संरचना और संख्या के अनुसार आगामी स्थानीय निकाय चुनाव कराने की घोषणा की। 2017 के सदस्यों की इस संबंध में राज्य चुनाव आयोग की सचिव किरण कुरुंदकर ने सभी 13 महानगरपालिकाओं को आदेश जारी कर दिया है। इसमें आगामी नगर निकाय चुनाव के लिए आरक्षण, मतदाता सूची और अन्य सभी प्रक्रियाओं को रोकने की बात कही गई है। 

     पूरा संघर्ष सफल हुआ

    राज्य चुनाव आयोग के इस आदेश के बाद विलास मडिगेरी ने कहा है कि हमें हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लड़ना पड़ा। हालांकि राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। पूर्ववर्ती महाविकास अघाड़ी सरकार ने वार्ड निर्माण, मतदाता सूची और आरक्षण ड्रा के डिजाइन में बड़ी संख्या में गलतियां की थीं।  इसके सभी प्रमाण राज्यपाल, महानगरपालिका चुनाव प्रणाली, राज्य चुनाव आयोग, भारत निर्वाचन आयोग, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बार-बार प्रस्तुत किए गए। यह पूरा संघर्ष राज्य सरकार के निर्णय और राज्य चुनाव आयोग के इस आदेश के कारण सफल हुआ है।

    2021 की जनगणना नहीं हो सकी

    चुनाव प्रक्रिया में पूर्व की गलतियों के बारे में विलास मड़ीगेरी ने कहा है कि राज्य महानगरपालिकाओं के लिए राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 30 सितंबर 2021 को महाविकास आघाड़ी सरकार द्वारा किए गए संशोधन के अनुसार 3 सदस्यीय वार्ड संरचना को 13 मई 2022 को अंतिम रूप दिया गया। हालांकि, 4 मई और फिर 20 जुलाई को दिए गए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने 10 मार्च 2022 को उपलब्ध वार्ड संरचना के अनुसार 2 सप्ताह में चुनाव प्रक्रिया आयोजित करने के निर्देश दिए। यानी 2017 वार्ड का गठन 10 मार्च 2022 को अंतिम था।  इसके अलावा, जनगणना वर्ष 2011 में की गई थी। कोरोना महामारी के चलते आज तक वर्ष 2021 की जनगणना नहीं हो सकी। इसलिए सरकार ने जनसंख्या मानकर पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका आम चुनाव 2022 के लिए नगरसेवकों की संख्या 128 से बढ़ाकर 139 कर दी। यह गलत भी है और अवैध भी क्योंकि जनगणना नहीं होने पर जनप्रतिनिधियों के सदस्यों की संख्या नहीं बढ़ाई जा सकती। हमने एक पत्र के माध्यम से इस मामले का अनुरोध किया था।  इस संबंध में मनपा प्रशासन और राज्य चुनाव आयोग ने जनता की राय की अनदेखी और अनादर किया है। आम चुनाव 2022 के कार्यक्रम की घोषणा करते हुए हर स्तर पर (वार्ड गठन आपत्ति, आरक्षण आपत्ति, मतदाता सूची आपत्ति की सुनवाई में) सभी आपत्तियों को राजनीतिक दबाव में खारिज कर नियमों का गलत उल्लंघन किया गया है जबकि आपत्तियां सही हैं। दरअसल, जब चुनाव आयोग ने नए ओबीसी आरक्षण कार्यक्रम की घोषणा की तो नए वार्ड ढांचे की घोषणा करना भी जरूरी हो गया था। मैंने राज्य के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मांग की कि तत्कालीन महाविकास आघाड़ी सरकार के दबाव में जो पूरी प्रक्रिया की गई, साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी की गई उसे रद्द किया जाए। साथ ही चुनाव आयोग और महानगरपालिका द्वारा कुप्रबंधन की जानकारी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भी जानकारी दी गई।