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    पिंपरी : राज्य सरकार ने हालिया तीन सदस्यीय प्रभाग पद्धति से महानगरपालिका चुनाव (Municipal Elections) कराने का फैसला किया है। इसके विरोध में पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (Pimpri-Chinchwad Municipal Corporation) के पूर्व नगरसेवक और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता मारुति भापकर (Maruti Bhapkar) ने कानूनी विशेषज्ञ एड. असीम सरोदे जरिए उच्च न्यायालय में एक याचिका (Petition) दायर की है। इस याचिका में राज्य चुनाव आयुक्त के साथ-साथ महाराष्ट्र राज्य सरकार को भी प्रतिवादी बनाया गया है। 

    याचिकाकर्ता मारुति भापकर ने मांग की है कि राज्य सरकार वार्ड कार्यकारी अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम की धारा 29 ब, क, ड और ई में आवश्यक बदलाव करे, ताकि धारा 29 ब और क में आवश्यक बदलाव किया जा सके। जो यह निर्धारित करता है कि एक वार्ड में 2 से अधिक और 5 से कम मतदान केंद्र होने चाहिए, लेकिन यदि एक वार्ड में 3 प्रतिनिधि हैं, तो संख्या 10 से 15 मतदान केंद्रों तक जाती है। इससे वार्ड बड़ा हो जाता है और तकनीकी रूप से वार्ड (क्षेत्र) की बैठकें करना संभव नहीं है। इससे नागरिक जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछने और यहां तक कि अपने विचार व्यक्त करने में सक्षम नहीं हैं, जोकि लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

    …तो पूरी तस्वीर बदल सकती है

    राज्य चुनाव आयोग के पास अधिनियम के तहत राज्य सरकार के निर्णय को रद्द करने की शक्ति है, जो कि महाराष्ट्र नगर (संशोधन) अधिनियम,1994 की धारा 5 (3) में किए गए संशोधन के अनुसार राज्य को नामित करने के लिए तीन सदस्यीय वार्ड बनाने के लिए है। चुनाव आयुक्त के स्थान पर राज्य सरकार, वार्ड की सीमाओं के साथ-साथ प्रत्येक वार्ड में उम्मीदवारों की संख्या निर्धारित करने का अधिकार। अगर अदालत इस व्याख्या को स्वीकार कर लेती है तो पूरी तस्वीर बदल सकती है। 74वें संशोधन के अनुसार शहरी पंचायत राज को लागू करने और स्थानीय स्वशासी निकायों को मजबूत करने, हमारे क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए सुझाव देने, जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी तय करने, आम जनता की सत्ता में सक्रिय भागीदारी के लिए याचिका महत्वपूर्ण है। 

    कई राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं

    दरअसल, सभी महानगरपालिका में मतदाताओं द्वारा एक वार्ड-एक उम्मीदवार की मांग की जानी चाहिए। मारुति भापकर ने याचिका में कहा कि अध्यादेश, जिसमें एक वार्ड से तीन सदस्य होते हैं, को तब तक के लिए स्थगित किया जाना चाहिए जब तक कि सरकार वार्ड सभा (क्षेत्रीय सभा) के कार्यकारी अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया पर स्पष्ट प्रावधान नहीं करती। याचिका में दो सदस्यीय वार्ड या चार सदस्यीय वार्ड द्वारा राजनीति में लोकतंत्र के इस्तेमाल पर तब तक स्थायी प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है जब तक कि क्षेत्रीय बैठकें आयोजित करने के लिए नियम नहीं बनाए जाते। मुंबई, ठाणे, पुणे, उल्हासनगर, भिवंडी-निजामपुर, पनवेल, मीरा-भायंदर, पिंपरी चिंचवड़, सोलापुर, नासिक, मालेगांव, परभणी,नांदेड़-वाघाला, लातूर, अमरावती, अकोला, नागपुर और चंद्रपुर में आगामी चुनावों को प्रभावित कर रहा है। यह एक याचिका हो सकती है इसलिए कई राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। असीम सरोदे के साथ, एड अजिंक्य उडाने, एड अजीत देशपांडे और अक्षय देसाई सह-अधिवक्ता के रूप में काम कर रहे हैं।