Pimpri-Chinchwad Municipal Corporation

    पिंपरी : कोरोना (Corona) की वजह से स्थानीय निकायों के आम चुनाव (Election) में देरी होने की अटकलों के बीच राज्य चुनाव आयोग ने वार्ड संरचना का मसौदा तैयार करने के लिए 30 नवंबर की समय सीमा तय की है। पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (Pimpri-Chinchwad Municipal Corporation) द्वारा शुरू की गई इसकी तैयारी अंतिम चरण में है। राज्य सरकार के नए फैसले के अनुसार, महानगरपालिका में नगरसेवकों (Corporators) की संख्या 128 से बढ़कर 139 हो गई है। नवगठित प्रभाग की आबादी घटने जा रही है। ऐसे में मतदाता (Voter)संख्या में गिरावट आने से उम्मीदवारों का प्रचार का भार कम होगा।

    पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के मौजूदा नगरसेवकों का कार्यकाल फरवरी माह में समाप्त हो जाएगा। ऐसे में अगला साल चुनावी साल होने जा रहा है। कोरोना की स्थिति नियंत्रण में होते ही राज्य सरकार ने महानगरपालिका के तीन सदस्यीय वार्डों के लिए चुनाव कराने का निर्णय लिया है। चूंकि 2021 में कोई जनगणना नहीं हुई थी, इसलिए यह चुनाव 2011 की पुरानी जनगणना के अनुसार होगा। इसलिए चर्चा थी कि नगरसेवकों की संख्या नहीं बढ़ेगी। हालांकि राज्य सरकार ने नगरसेवकों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया।

    2011 की जनगणना के आधार पर होंगे चुनाव

    आम चुनाव 2011 की जनगणना के आधार पर होंगे। इस हिसाब से शहर की आबादी 17 लाख 27 हजार 692 है, जिनमें से 13 लाख 50 हजार मतदाता हैं।  विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही मतदाता पंजीकरण शुरू हो गया हो, लेकिन मतदाताओं की संख्या 14 लाख तक तय की जा सकती है। 2011 की जनगणना के अनुसार वार्ड संरचना का रफ ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। राज्य चुनाव आयोग ने हाल ही में महानगरपालिका को एक परिपत्र भेजा है जिसमें वार्ड संरचना का रफ ड्राफ्ट तैयार करने की अवधि तय की गई है। यह भी सुझाव दिया गया है कि महानगरपालिका क्षेत्र की जनसंख्या के अनुसार कितने वार्ड बनाए जाएं।

    बढ़ेगी नगरसेवकों की संख्या

    पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका कमिश्नर ने राज्य चुनाव आयोग को 30 नवंबर तक वार्डों का रफ प्लान तैयार करने का निर्देश दिया है। महानगरपालिका का 2017 का चुनाव चार सदस्यीय प्रणाली में हुआ था। उस समय महानगरपालिका के नगरसेवकों की संख्या 128 थी। एक वार्ड की जनसंख्या 36,000 से 44,000 के बीच थी और वार्ड की संख्या 32 थी। आगामी चुनाव तीन सदस्यीय वार्ड प्रणाली होगा यानी तीन नगरसेवकों के एक वार्ड में होंगे। इसके अलावा महानगरपालिका के नगरसेवकों की संख्या 11 बढ़ने से यह 128 से बढ़कर 139 हो गई है। इसमें अनुसूचित जाति (एससी) आरक्षित सीट की संख्या दोगुनी होकर 22 हो गई है, जबकि 3 सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित रहेंगी। ओबीसी के लिए 38 और 76 सीटें खुले प्रवर्ग की होंगी।

    उम्मीदवारों को मिलेगी राहत

    2011 की जनसंख्या और नगरसेवकों की संख्या में वृद्धि मानकर नवगठित वार्ड की जनसंख्या में कमी आएगी। इसके अनुसार कुल 46 नव निर्मित वार्ड होंगे। इनमें से 45 वार्ड तीन नगरसेवकों के लिए और एक वार्ड चार नगरसेवकों के लिए होगा। महानगरपालिका कमिश्नर के पास यह तय करने का एकमात्र अधिकार है कि यह कौन सा वार्ड बनाया जाए। नवगठित वार्ड की जनसंख्या न्यूनतम 33 हजार 559 तथा अधिकतम 41 हजार 17 होगी। औसत जनसंख्या 37 हजार 288 होगी। 2017 के चुनाव की तुलना में वार्ड की आबादी में करीब तीन हजार की कमी आएगी। जैसे-जैसे जनसंख्या घटेगी, वैसे-वैसे मतदाता भी घटेंगे। इससे उम्मीदवारों को राहत मिलेगी। उन पर से प्रचार का भार कम होगा।