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    पिंपरी. महानगरपालिका अस्पतालों (Municipal Hospitals) में मैनपावर (Manpower) की आउटसोर्सिंग (Outsourcing) के खिलाफ पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (Pimpri-Chinchwad Municipal Corporation) के मानदेय के आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों ने आंदोलन (Protest) किया। ठेकेदारी हटाओ, मनपा बचाओ, नहीं चलेगी नहीं चलेगी, ठेकेदारी नहीं चलेगी, ठेकेदारी का भ्रष्टाचार खत्म होना ही चाहिए, ठेकेदारी हटाओ, कोरोना योद्धाओं को बचाओ जैसे नारों की तख्तियां हाथों में लेकर यह आंदोलन किया गया। 

    महानगरपालिका के विभिन्न हॉस्पिटलों में निजी एजेंसी के जरिये मैनपावर उपलब्ध करवाने के लिए सत्ताधारी भाजपा ने मंजूरी दी है। इसके अनुसार, महानगरपालिका के वाईसीएम हॉस्पिटल समेत अन्य नौ हॉस्पिटलों में चिकित्सा अधिकारियों से लेकर स्टाफ नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ के साथ अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति आउटसोर्सिंग के द्वारा की जाएगी। इन हॉस्पिटलों में मैनपावर सप्लाई करने के लिए तीन ठेकेदारों की नियुक्ति दो वर्ष के लिए की गई है। इस निजीकरण को मानदेय आधार पर कार्यरत कर्मचारियों द्वारा सख्त विरोध किया जा रहा है। 

    कमिश्नर के साथ होगी बैठक

    कोविड योद्धा बचाव कृति समिति की ओर से उक्त फैसले के विरोध में महानगरपालिका के प्रवेश द्वार के सामने आंदोलन किया गया। कोविड योद्धाओं को न्याय मिले, मानदेय आधार पर कायम रखे, समान काम समान वेतन दिया जाए, हमें ठेकेदारी में न धकेलें, 11 महीने के एग्रीमेंट आधार पर काम पर रखें, स्थायी कर्मचारियों की तरह सारी सुविधाएं दी जाएं आदि मांगें इन कर्मचारियों द्वारा की गई। मनसे (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) के गुटनेता सचिन चिखले ने इन कर्मचारियों से मुलाकात कर उनसे संवाद साधा। उन्होंने कहा कि इस संबंध में महानगरपालिका कमिश्नर राजेश पाटिल के साथ बैठक की जाएगी।