Sanjog Waghere

    पिंपरी. केंद्र सरकार (Central Government) की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटी परियोजना (Smart City Project) के नाम पर पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका (Pimpri-Chinchwad Municipal Corporation) की सत्ताधारी भाजपा प्रशासन के साथ हाथ मिलाकर मनमाना कामकाज कर रही है। इसके एक से एक उदाहरण सामने आ रहे हैं। इस कड़ी में स्मार्ट सिटी कंपनी के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) के पद पर भाजपा (BJP) के नेता नामदेव ढाके (Namdev Dhake) के निजी सहायक (पीए) की नियमबाह्य तरीके से नियुक्ति किए जाने की घटना सामने आई है। यह एक गंभीर मसला है जिससे प्रशासन की गोपनीयता और विश्वसनीयता को खतरा पहुंचा है। इससे स्मार्ट सिटी के कामकाज में भाजपा द्वारा दखल-अंदाजी भी उजागर हुई है। इस पर तंज कसते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शहराध्यक्ष संजोग वाघेरे (Sanjog Waghre) ने कहा कि यह स्मार्ट सिटी कंपनी नहीं, बल्कि पिंपरी-चिंचवड़ स्मार्ट भाजपा कंपनी है।

    इस संबंध में संजोग वाघेरे पाटिल ने महानगरपालिका कमिश्नर और स्मार्ट सिटी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) राजेश पाटिल को पत्र भेजकर यह नियुक्ति तुरंत रद्द करने की मांग की है। इसमें उन्होंने कहा है कि महानगरपालिका में सत्ताधारी भाजपा का साढ़े चार वर्षों का कामकाज शहरवासियों ने देखा है। स्मार्ट सिटी के नाम पर शहर की क्या बुरी हालत की गई है, यह खुदाई की गई सड़कों के जरिए शहरवासी देख रहे हैं। स्मार्ट सिटी के कार्यों में भ्रष्टाचार से भाजपा का नाता भी सामने आया है। इसके बाद स्मार्ट सिटी में भाई-भतीजावाद कर अपने पिटठुओं को पालने का काम भाजपा ने जारी रखा है। 

     भाई-भतीजावाद उजागर हो गया 

    स्मार्ट सिटी कंपनी के लिए सत्ताधारी भाजपा के नेता नामदेव ढाके के निकट के व्यक्ति की नियुक्ति की जानकारी सामने आई है। ढाके सत्ताधारी भाजपा के नेता और वर्तमान में स्मार्ट सिटी कंपनी के निदेशक हैं। पिछले कुछ वर्षों से उनके पीए के रूप में उनके साथ काम कर रहे व्यक्ति को स्मार्ट सिटी में एक महत्वपूर्ण पद पर बिठाया गया है। इससे स्मार्ट सिटी के मामलों में भाजपा का हस्तक्षेप और भाई-भतीजावाद उजागर हो गया है।

    नियुक्ति में दखल-अंदाजी का आरोप 

    पता चला है कि इस भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने वाले अनुभवी उम्मीदवारों ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। इस नियुक्ति में दखल-अंदाजी का आरोप लगाया जा रहा है। इसकी शिकायत सीएमओ और पीएमओ तक की गई है। अगर सत्ताधारी भाजपा और उसके सहयोगी महानगरपालिका और स्मार्ट सिटी के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तो यह एक गंभीर मामला है। इससे यह सवाल पैदा होता है कि स्मार्ट सिटी कंपनी भाजपा चला रही है अथवा प्रशासन? प्रशासन की गोपनीयता और विश्वसनीयता को खतरा है। इसे ध्यान में रखते हुए महानगरपालिका कमिश्नर को कंपनी के सीईओ के तौर पर नियुक्ति को तुरंत रद्द करनी चाहिए। अन्यथा स्मार्ट सिटी कंपनी में दखल-अंदाजी के लिए महानगरपालिका कमिश्नर और पूरा प्रशासन जिम्मेदार होंगे। इसी तरह कंपनी का कामकाज चलेगा तो इसका नाम बदलकर स्मार्ट भाजपा कंपनी कर दिया जाना चाहिए, यह टिप्पणी भी वाघेरे ने की है।