बहुत हुई घोषणाबाजी, अब किसानों के खातों में पैसे जमा कराएं: प्रवीण दरेकर

    पुणे. प्राकृतिक आपदा हो या तूफान, राज्य सरकार ने बड़े-बड़े पैकेज की घोषणा की, लेकिन आज भी 50 फीसदी से ज्यादा पीड़ितों को राहत नहीं मिली है। अब घोषणाबाजी बहुत हो गई हैं, अब सीधे मदद की जरूरत है। विधान परिषद में विपक्ष के नेता प्रवीण दरेकर (Praveen Darekar) ने गुरुवार को पुणे (Pune) में एक संवाददाता सम्मेलन के जरिए राज्य सरकार से मांग की कि सहायता कुछ महीनों के बाद नहीं, बल्कि तुरंत किसानों (Farmers) के खाते (Accounts) में जमा की जानी चाहिए और किसानों को राहत दी जानी चाहिए।

    उन्होंने कहा कि विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस और मैं मराठवाड़ा के दो दिवसीय दौरे पर जा रहे हैं। हम वाशिम, बीड, हिंगोली, औरंगाबाद, उस्मानाबाद, नांदेड़ के किसानों को बाढ़ग्रस्त इलाकों का निरीक्षण कर, वहां के किसानों से मुलाकात कर, उनके बांधों का दौरा कर राहत पहुंचाने की कोशिश करेंगे। इतने दिनों के बाद भी प्रभावित किसानों को कोई आपातकालीन सहायता नहीं दी गई है। मंत्री धनंजय मुंडे और विजय वड़ेट्टीवार ने बिना पंचनामा के मदद करने का वादा किया है। इसलिए मुख्यमंत्री के सिर्फ बात करने से न तो राहत मिलेगी और न ही धैर्य। उन्हें इस संबंध में तत्काल आदेश जारी करना चाहिए।

     राज्य सरकार मराठवाड़ा और उत्तरी महाराष्ट्र में गीला अकाल घोषित करें

    दरेकर ने मांग की कि राज्य सरकार एक स्पष्ट रुख अपनाए और मराठवाड़ा और उत्तरी महाराष्ट्र में गीला अकाल घोषित करे। फसल क्षति और खेतों का पंचनामा जब करना है तब करें, लेकिन अब किसानों को तत्काल मदद की जरूरत है क्योंकि अब मदद दी जाए और किसान को धैर्य दिया जाए तो ही उनका फायदा होगा। आज मराठवाड़ा पूरी तरह तबाह हो चुका है, वीरान हो गया है, इसकी खेती पानी में डूब गई है। इसलिए मुख्यमंत्री को तत्काल मदद का ऐलान करना चाहिए। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक ओर किसान संकट में हैं और दूसरी ओर नेता का स्वागत पटाखों की आतिशबाजी से किया जाता है। यह किसान के घाव पर नमक छिड़कने जैसा है। सरकार को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए, लेकिन यहां सरकार संवेदनहीन नजर आ रही है। 

    हम केंद्र से भी मदद मांगेंगे

    दरेकर ने कहा कि महाविकास आघाड़ी की एक ही निश्चित भूमिका है कि अगर कुछ भी हो जाय तो उसे केंद्र सरकार के नाम पर धकेल कर छोड़ दिया जाता है। केंद्र अब तक किसानों को करीब 1500 करोड़ रुपये मुहैया करा चुका है। एनडीआरएफ के माध्यम से सहायता की है। चाहे तूफान हो, या बाढ़ से नुकसान हो, केंद्र हर समय बचाव में आया है। हम केंद्र से भी मदद मांगेंगे। उस पर नाराज होने का कोई कारण नहीं है। मगर केंद्र पर उंगली उठाकर राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकती। कुछ भी हुआ तो महाविकास आघाड़ी सरकार की रणनीति केंद्र और राज्य के बीच विवाद पैदा करना और अपनी मूल जिम्मेदारी को दरकिनार करना है। दरेकर ने यह भी कहा कि राज्य सरकार केंद्र पर उंगली उठाकर लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।

    किसानों को नहीं मिली मदद

    पिछले साल के नुकसान किसानों को अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। कोंकण में तूफान आया, चक्रवात आया, लेकिन अभी तक मदद नहीं मिली है। घोषणाएं जोर-शोर से हुईं, लेकिन आज भी पैसा नहीं मिला है। हम आपके साथ केंद्र सरकार के पास मदद के लिए आएंगे, देवेंद्रजी, चंद्रकांत दादा आएंगे। मगर सिर्फ केंद्र की ओर इशारा करना बंद करो। किसानों की तुरंत मदद करें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संकट के समय किसी को भी राजनीतिक भूमिका नहीं निभानी चाहिए।