पिंपरी-चिंचवड़ शहर के पुलिस कमिश्नर कृष्ण प्रकाश के साथ इन लोगों ने देखी झुंड फ़िल्म

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    पिंपरी: रिटायर्ड फुटबॉल खिलाड़ी विजय बारसे (Vijay Barse) की जीवनी पर आधारित मराठी फिल्म झुंड (Film Jhund ) इन दिनों चर्चा में है। गलत राह पर चलकर जीनेवाले झुग्गी बस्तियों के किशोर उम्र के बच्चों के जीवन मे स्लम सॉकर, फुटबॉल से यह फ़िल्म कैसा बदलाव लाती है, इस पर आधारित यह फ़िल्म मशहूर निर्देशक नागराज मंजुले (Nagraj Manjule) ने निर्देशित की है। विजय बारसे और पिंपरी-चिंचवड़ शहर के पुलिस कमिश्नर कृष्ण प्रकाश (Police Commissioner Krishna Prakash) के साथ जुवेनाइल, झुग्गी बस्तियों के बच्चे और फुटबॉल खिलाड़ियों ने चिंचवड़ के एल्प्रो सिटी मॉल स्थित आयनॉक्स थिएटर में इस फ़िल्म का लुत्फ उठाया। 

    ‘झुंड’ फ़िल्म झुग्गी बस्ती के बच्चों पर आधारित है। नागपुर के सेवानिवृत्त खेल प्रशिक्षक विजय बारसे ने झुग्गी बस्तियों के बच्चों को प्रशिक्षण देकर उन्हें फुटबॉल खिलाड़ी बनाया है। अपराध की ओर झुके ये बच्चे फुटबॉल खेलते हुए कैसे सुधर गए, बारसे ने उनमें फुटबॉल के प्रति रुचि कैसे निर्माण की? यह इस फ़िल्म में फिल्माया गया है। उनके इसी काम को चिन्हित करती है यह फ़िल्म, जिसमें बारसे की भूमिका सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने निभाई है।

    खास शो का किया गया आयोजन

    शहर के ऐसे ही बच्चों के लिए झुंड फ़िल्म का खास शो आयोजित किया गया था, जिसके लिए संदेश बोरडे, ऋषिकेश तपशालकर, कपिलेश इगवे, और सज्जी वर्की ने विशेष प्रयत्न किए और ऐसे बच्चों को इकट्ठा किया। 55 से 60 बच्चों ने इस फ़िल्म का लाभ उठाया। अपनी गलतियों को सुधार कर जीवन मे आगे कैसे बढ़ा जाए, यह हमें इस फ़िल्म ने सिखाया है, यह प्रतिक्रिया इन बच्चों ने व्यक्त की। 

    पिंपरी-चिंचवड़ में स्लम सॉकर का काम बेहतरीन तरीके से चल रहा 

    विजय बारसे ने फिल्म देखने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पिंपरी-चिंचवड़ में स्लम सॉकर का काम बेहतरीन तरीके से चल रहा है। इन बच्चों और उनके गुरुओं की जितनी तारीफ की जाए कम है। इस टीम के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों का चयन राज्य स्तर पर खेलने के लिए किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह पिंपरी-चिंचवड़ में होने वाली स्लम सॉकर नेशनल चैंपियनशिप दिलाने की कोशिश करेंगे। 

    एक प्रेरणादायक फिल्म: पुलिस कमिश्नर  

    पुलिस कमिश्नर कृष्ण प्रकाश ने कहा कि यह उन बच्चों के लिए एक प्रेरणादायक फिल्म है जो अपना रास्ता भटक गए हैं और जो बच्चे कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। यह फिल्म बच्चों के जीवन में आमूलचूल परिवर्तन लाने में मदद करेगी। सहायक पुलिस आयुक्त सागर कवडे, विशेष बाल दस्ते की दीपाली शिर्के, संवाद संस्था के गजानन कोर्डे, गौरव चौधरी, कुंदन कस्बे, सुमित जगदाने, अमित शिंदे, आईनॉक्स के यूनिट मैनेजर सदानंद सावंत ने कार्यक्रम में सहयोग किया।