Will Sharad Pawar and Ajit Pawar be together again after Lok Sabha elections 2024
शरद पवार और अजित पवार (फोटो-सोशल मीडिया)

बारामती लोकसभा चुनाव के बाद क्या पहले जैसे रहेंगे चाचा-भतीजे के पुराने रिश्ते? अजित पवार से पूछा गया कि क्या आप और शरद पवार एक साथ आएंगे। इस पर अजित पवार ने टिप्पणी की है।

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पुणे: शरद पवार (Sharad Pawar) से बगावत कर अजित पवार (Ajit Pawar) ने भाजपा (BJP) सरकार से हाथ मिला लिया था। इस तरह पवार परिवार में फूट पड गई। लोकसभा चुनाव (Lok Sabha elections 2024) में महाराष्ट्र (Maharashtra Politics) की बारामती लोकसभा सीट (Baramati Lok Sabha Seat) चर्चा का विषय बनी हुई है , क्योकि यहां चुनावी मुकाबला सीधे तौर पर शरद पवार और अजित पवार के बीच होने जा रहा है। जैसा की सब जानते है अजित पवार के बीजेपी के साथ सरकार में शामिल होने के बाद पवार परिवार में टूट गया। हालांकि सवाल यह भी है कि क्या लोकसभा चुनाव 2024 के बाद अजित पवार और शरद पवार के बीच पुराने रिश्ते फिर से बन जायेंगे? क्या चाचा-भतीजा फिर एक होंगे, इन सवालों का जवाब अजित पवार ने दिया है।

एक साथ आने पर अजित पवार ने कहा..

दरअसल सोमवार को ‘एबीपी माजा’ को दिए इंटरव्यू में अजित पवार ने इस विषय में एक टिप्पणी की है। इंटरव्यू के दौरान अजित पवार से पूछा गया कि क्या लोकसभा चुनाव के बाद शरद पवार और आपके बीच पुराने रिश्ते पहले जैसे हो जाएंगे? इस पर अजित पवार ने कहा, ”बारामती में 7 तारीख को चुनाव होने दीजिए। तब तक मैं इस मामले पर कुछ नहीं कहूंगा। क्योंकि इस वक्त बारामती में एक अलग ही मुहिम चल रही है। कहा जा रहा है कि हम बाद में साथ आएंगे। यह प्रचार लोगों को गुमराह कर रहा है।”

बुजुर्गों को मुझे आशीर्वाद

आगे अजित पवार ने कहा, ”इस संबंध में मेरे मतदाताओं, सहकर्मियों और कार्यकर्ताओं को यह संदेश जाना चाहिए कि मैंने जो राजनीतिक रुख अपनाया है, उस पर कायम रहूंगा।’ अजित पवार ने कहा कि लोगों को मेरा समर्थन करना चाहिए, बुजुर्गों को मुझे आशीर्वाद देना चाहिए और मतदाताओं को मुझे मजबूत समर्थन देना चाहिए।

बारामती में पवार परिवार आमने-सामने

बारामती को लेकर आज तक ये समीकरण था कि बारामती का मतलब है पवार परिवार। लेकिन, इस साल बारामती में पवार परिवार के दो दिग्गज नेता एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए हैं। शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले और अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार एक दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। परिवार में इस लड़ाई को लेकर एक इंटरव्यू में अजित पवार से सवाल पूछा गया।

डटकर खड़े है अजित पवार

अजित पर से पूछा गया कि क्या अपनी बहन के खिलाफ प्रचार करने से दुख होता है? इस सवाल का जवाब देते हुए अजित पवार ने कहा कि ”ये भावनात्मक रिश्ता चुनाव में काम नहीं आता। मैंने 7 मई तक भावुक, नरम नहीं होने का फैसला किया है। अगर बारामती का और अधिक विकास करना है तो राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर काम करें तो यह तेजी से किया जा सकता है। बारामती सीट पर जहां चुनावी घमासान जारी है, वहीं अन्य उम्मीदवार भी जीत के लिए अपना जोर लगा रहे हैं। यह लड़ाई भाईचारे या गांव की लड़ाई नहीं है। यह लड़ाई देश के लिए लड़नी है” इस तरह बारामती लोकसभा चुनाव को लेकर अजित पवार ने कड़ा रुख अपनाया है। अब देखना यह होगा की बारामती मैदान से कौन बाजी मारता है।