Workers expressed anger through Jan Aakrosh Protest

    पिंपरी. किसानों और मजदूर हितों के विरोधी कानून वापस लेने, महंगाई और ईंधन की दरवृद्धि पर नियंत्रण लेने समेत विभिन्न मांगों के लिए संयुक्त किसान मोर्चा, मजदूर संगठन संयुक्त कृति समिति, महाविकास आघाडी की ओर से सोमवार को भारत बंद जन आक्रोश आंदोलन के जरिए मजदूरों ने पिंपरी-चिंचवड़ में केंद्र सरकार के खिलाफ गुस्सा उतारा।

    पिंपरी चौक स्थित डॉ बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक के पास हुई सभा में मजदूर संगठन संयुक्त कृति समिति के अध्यक्ष डॉ. कैलाश कदम ने इस आंदोलन को केवल किसानों और मजदूरों का नहीं, बल्कि समाज के हर तबके का प्रतिनिधिक आंदोलन बताकर किसान और मजदूर हितों के विरोधी काले कानूनों को रद्द करने की मांग की।

    कई संगठनों ने लिया हिस्सा  

    इस मौके पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शहराध्यक्ष संजोग वाघेरे पाटिल, एनसीपी महिला शहराध्यक्षा वैशाली कालभोर, वरिष्ठ मजदूर नेता अजीत अभ्यंकर, लता भिसे, मानव कांबले, पूर्व नगरसेवक मारुति भापकर, अरुण बो-हाडे, सहित कई नेता और पदाधिकारी शामिल थे। इस आंदोलनात में इंटक, आयटक, सीटू, टीयूसीसी, राष्ट्रवादी मजदूर सेल, भारतीय कामगार सेना, श्रमिक एकता महासंघ, राष्ट्रीय श्रमिक एकता महासंघ, प्रहार जनशक्ति पक्ष, हिंद कामगार संघटना, ग्रीव्हज कॉटन एंड अलाईड कंपनी एम्पॉईज युनियन, पूना एम्प्लॉईज युनियन (आयटक), बैंक एम्प्लॉईज फेडरेशन ऑल इंडिया डीफेन्स फेडरेशन, रक्षा, पोस्ट, बीएसएनएल, केंद्र सरकारी (नर्सेस व अन्य) अंगनवाडी, बालवाडी, आशा कर्मचारी, पथारी-फेरीवाले, घर कामगार संघटना, विद्यार्थी और युवक संगठन, कात्रज दूध उत्पादक संघ, संघटना इंटक, बैंक कर्मचारी संघ इंटक के प्रतिनिधि शामिल हुए।

    10 हजार रुपए की वित्तीय सहायता सहित कई मांगें रखी गईं

     इस आंदोलन के जरिए केंद्र सरकार से किसान विरोधी 3 और मजदूरों के विरोधी 4 अन्यायकारी कानून रद्द करने, कृषि उपज को गारंटी मूल्य देने, मजदूरों के उत्थान के लिए कानून में बदलाव करने मजदूर संगठनों से चर्चा करने, कोविड की बदौलत रोजगार और स्वरोजगार के अवसर छीन गए अंसगठित मजदूरों को 10 हजार रुपए की वित्तीय सहायता सहित कई मांगें रखी गईं।