राज्य भर में APMC की सांकेतिक हड़ताल, बंद रहीं कृषि उपज मंडिया

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नवभारत न्यूज़ नेटवर्क
मुंबई: सरकार द्वारा कृषि उपज मंडी समिति की नीति में बदलाव के निर्णय के विरोध में सोमवार को राज्य की अधिकांश मंडियों में हड़ताल रही। विदर्भ,मराठावाड़ा,पश्चिम व उत्तर महाराष्ट्र के अधिकांश जिलों की एपीएमसी ने सांकेतिक हड़ताल में हिस्सा लिया। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि एपीएमसी में बिना चुनाव के स्थायी प्रशासक की नियुक्ति की जायेगी। एपीएमसी से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि राज्य सरकार का यह निर्णय किसानों के अधिकारों पर कुठाराघात है। इसलिए इस फैसले को वापस लेने की मांग को लेकर 26 फरवरी को प्रदेश की सभी बाजार समितियों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। नागपुर के कलमना में कृषि उपज बाजार समिति बंद रही इसके चलते करोड़ों का दैनिक कारोबार नहीं हो सका। इसी तरह विदर्भ और अन्य हिस्सों की एपीएमसी में भी एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल रही। 

धरना आंदोलन
राज्य के विपणन कानूनों में बदलाव के विरोध में महाराष्ट्र राज्य बाजार समिती सहकारी संघ की ओर से सोमवार को राज्य के विभिन्न स्थानों की बाजार समितियों के परिसर में एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया गया। कृषि उत्पादन बाजार समिति के अध्यक्ष ने कुछ बाजारों और जिला उप रजिस्ट्रारों को पत्र भेजकर हड़ताल की जानकारी दी थी और बंद का समर्थन करने का आग्रह किया था। इसमें कहा गया कि एक दिन के लिए राज्य की बाजार समिति सभी प्रकार की कृषि वस्तुओं की नीलामी बंद कर इस सांकेतिक हड़ताल का समर्थन करें। बंद के मद्देनजर हाल ही में पुणे में राज्यव्यापी कृषि उपज बाजार समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सचिव की बैठक हुई। 

राज्य सरकार के फैसले का विरोध
राज्य सरकार ने बाजार समितियों को प्रशासकों को सौंपने का निर्णय लिया है। इससे किसानों के अधिकार प्रभावित होंगे। ऐसा दावा  महाराष्ट्र राज्य बाजार समिति सहकारी संघ की बैठक में किया गया। इसी के मद्देनजर राज्य भर की एपीएमसी में हड़ताल हुई। बताया गया कि चंद्रपुर जिले में चंद्रपुर, कोठारी, गोंडपिंपारी, पोंभुरना, राजुरा, कोरपना, मूल, सिंदेवाही, वरोरा, भद्रावती, चिमूर, ब्रह्मपुरी, नागभीड, सावली में कृषि उपज बाजार समितियां बंद रहीं। महाराष्ट्र राज्य बाजार समिति सहकारी संघ ने मांग की है कि कृषि उपज विपणन (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1963 में प्रस्तावित बदलाव नहीं किए जाने चाहिए और 2018 के महाराष्ट्र विधानसभा विधेयक संख्या 64 के तहत चल रहे बदलाव नहीं किए जाने चाहिए। हालांकि इस नवी मुंबई एपीएमसी में सांकेतिक हड़ताल नहीं हुई।