Representational Pic
Representational Pic

    कल्याण. भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) (भाजपा) की ओर से ओबीसी आरक्षण (OBC Reservation) हटाने को लेकर राज्य (State) की अघाड़ी सरकार (Aghadi Government) के खिलाफ कल्याण तहसील कार्यालय (Kalyan Tehsil Office) में आंदोलन किया गया।भाजपा ने मांग की है कि मुख्यमंत्री ठाकरे और वरिष्ठ नेता शरद पवार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले के इस आरोप का जवाब दें कि ठाकरे की अगुवाई बाली अघाड़ी सरकार ने उच्चतम न्यायालय में ओबीसी आरक्षण के बचाव के लिए वकील क्यों उपलब्ध नहीं कराया।

    तहसीलदार को ओबीसी आरक्षण लागू करने का  ज्ञापन सौंपा  गया। इस आंदोलन में विधायक रवींद्र चव्हाण, पूर्व विधायक नरेंद्र पवार, पूर्व मंत्री जगन्नाथ पाटिल, जिलाध्यक्ष शशिकांत कांबले, शहर  अध्यक्ष प्रेमनाथ म्हात्रे, उत्तर भारतीय मोर्चा के जिला अध्यक्ष, पूर्व उप महापैर मोरेश्वर भोईर और अन्य पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

    ओबीसी समुदाय के राजनीतिक आरक्षण को लेकर पिछले 6 महीने से गठबंधन सरकार में तकरार चल रही है।  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेतृत्व ने लगातार राज्य सरकार से कहा है कि वह ओबीसी समुदाय का सही डाटा एकत्र करने के लिए तत्काल कार्रवाई करे।  लेकिन गठबंधन सरकार ने पिछले 6 महीने में कोई कदम नहीं उठाया।  सही डेटा एकत्र करने के लिए नियुक्त पिछड़ा वर्ग आयोग को गठबंधन सरकार द्वारा वित्त पोषित भी नहीं किया गया था।  इसी लापरवाही के चलते ओबीसी आरक्षण के बिना 5 स्थानीय निकायों के चुनाव की घोषणा हो गई है।

    आरोपों पर स्पष्टीकरण की मांग

    राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी ढंग से नहीं उठाया है क्योंकि सत्ताधारी पार्टी ओबीसी समुदाय को आरक्षण दिए बिना अगले साल महानगर पालिका, नगरपालिका और जिला परिषद चुनाव कराना चाहती है, सत्ता पक्ष के प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में वकील नहीं उतारा है।  मुख्यमंत्री ठाकरे, जो कानून और न्याय विभाग के प्रभारी हैं, और शरद पवार, जो गठबंधन सरकार के संरक्षक होने का दावा करते हैं,  नाना पटोले के आरोपों पर स्पष्टीकरण की मांग की।

    मुख्यमंत्री ने बार-बार कहा है कि ओबीसी आरक्षण के बिना चुनाव नहीं होंगे। आरक्षण को बनाए रखने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की है।  भाजपा ने सूचित किया था कि आंदोलन गठबंधन सरकार के खिलाफ था जो ओबीसी समुदाय की पीठ में छुरा घोंप रही थी।