BJP corporator allegation, municipal corporation kind on big industry group

    ठाणे. पोखरण रोड (Pokhran Road) नंबर एक से ऊपर सड़क चौड़ीकरण (Road Widening) गंभीर विवादों (Serious Disputes) से घिर गया है। भाजपा नगरसेविका (BJP corporator) अर्चना मणेरा ने आरोप लगाया है कि एक बड़ी कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए महानगरपालिका (Municipal Corporation) ने विकास योजना (डीपी) में 40 मीटर के चौड़े सड़क को 48 मीटर कर दिया है। मामला महासभा में उठाए जाने के बाद अब महापौर नरेश म्हास्के ने इसकी जांच कर 10 दिन के अंदर रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।

    महासभा में अर्चना मणेरा ने पूछा था कि क्या कमिश्नर को विकास योजना में सड़क को बढ़ाने या घटाने का अधिकार है। उस समय नगर विकास विभाग के अधिकारियों ने सीधे तौर पर कोई जवाब नहीं दिया। हालांकि अधिकारी इस बात से सहमत थे कि कमिश्नर के पास नियमानुसार सड़क को बढ़ाने या घटाने का अधिकार नहीं है। इसके बाद नगरसेविका मणेरा ने कहा कि एक बड़ी कंपनी को  लाभ पहुंचाने के लिए उसके योजना के प्रवेश द्वार के पास डीपी में मंजूर सड़क की चौड़ाई 40 के बजाय 48 मीटर कर दी गई है।

    महासभा ने चौड़ीकरण को मंजूरी दी

    यह मामला महासभा में आने के बाद महासभा में मौजूद सभी नगरसेवक सन्न रह गए। तत्कालीन आयुक्त संजीव जायसवाल के कार्यकाल में महानगरपालिका की विकास योजना में पोखरण रोड नं. एक को 40 मीटर चौड़ा किया गया है। 40 में से 20 मीटर पर डिवाइडर लगाए जाने थे। हालांकि समतानगर की ओर जाने वाली सड़क को वास्तव में वर्षों से कार्यरत एक बड़े समूह के लाभ के लिए 48 मीटर तक चौड़ा किया गया था। उन्होंने सभागार का ध्यान आकृष्ट करते हुए बताया कि विशेष तौर पर कैडबरी सिग्नल से वर्तकनगर तक की सड़क 20 फीट और वर्तकनगर से कैडबरी सिग्नल तक की सड़क 28 फीट है। न तो स्थाई समिति और न ही महासभा ने चौड़ीकरण को मंजूरी दी।

    अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग 

    उन्होंने कहा कि सड़क की बढ़ाई गई चौड़ाई को लेकर स्थाई समिति और महासभा से मंजूरी नहीं ली गई है। ऐसे में यह अवैध सड़क चौड़ीकरण किसके आदेश से हुआ है। नगरसेविका मणेरा ने पूछा कि आठ मीटर अतिरिक्त सड़क पर महानगरपालिका ने आखिरकार खर्च क्यों की। इसके साथ ही उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग भी की। अंत में महापौर नरेश म्हस्के ने प्रशासन को विस्तृत जांच कर दस दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।