आधे घंटे की दूरी तय करने में लग रहा है 3 घंटे का समय

    भिवंडी. पिछले 2 महीनों के अंतराल में भिवंडी (Bhiwandi) से ठाणे शहर (Thane City) की 20 किलोमीटर की दूरी तय करने में आधे घंटे की जगह 3 घंटे का मुसीबत भरा समय लग रहा हैं। इसका मुख्य कारण है, 20 किलोमीटर की दूरी में 10 किलोमीटर तक का लंबा भयंकर ट्रैफिक जाम। शासन प्रशासन की घोर लापरवाही और अनदेखी के कारण 24 घंटे के लग रहे इस भीषण ट्रैफिक जाम (Traffic Jam) से वाहन चालक (Vehicle Driver)और यात्री जान हथेली पर रखकर जूझने को मजबूर हैं।

    मुंबई-नाशिक हाईवे स्थित भिवंडी के राजनोली नाका से ठाणे आने जाने के लिए भिवंडी शहर में ट्रैफिक जाम की फोटो के साथ एक संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है कि भिवंडी से ठाणे न आना है न जाना है। अब सड़कों को लेकर पिछले सप्ताह ठाणे जिला पालक मंत्री एकनाथ शिंदे ने भिवंडी के आसपास क्षेत्रों का दौरा करके सड़कों की मरम्मत कर यातायात को सुचारू रूप से चलाने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए थे, लेकिन उसका भी कोई असर आज तक दिखाई नहीं पड़ रहा है। यात्रा करने वालों का कहना है कि शासन-प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं रह गई है सब भगवान भरोसे चल रहा है।

    मुख्य चिकित्सालय ठाणे शहर में स्थित है

    गौरतलब है कि भिवंडी शहर ठाणे जिला के अंतर्गत आता है, कई महत्वपूर्ण सरकारी और अर्ध सरकारी कार्यालय, न्यायालय, मुख्य चिकित्सालय ठाणे शहर में स्थित है। जिसके कारण भिवंडी से हजारों लोगों का प्रतिदिन ठाणे आना जाना रहता है। पावरलूम औद्योगिक शहर होने के कारण भिवंडी के कई बड़े व्यापारी ठाणे और मुंबई में रहते हैं, जो प्रतिदिन मुंबई और ठाणे से  भिवंडी आते जाते हैं। भिवंडी और ठाणे के बीच की दूरी मात्र 20 किलोमीटर है।

    सप्ताह में 4 दिन तो 24 घंटे जाम लगता है

    पिछले 2 महीनों से बरसात के बाद सड़कों पर हुए अनगिनत गड्ढों के कारण भिवंडी ठाणे बाईपास हाइवे पर भीषण जाम लग रहा है। सप्ताह में 4 दिन तो 24 घंटे जाम लगता है। 20 किलोमीटर के अंतराल में दोनों शहर के बीच 10 किलोमीटर तक लंबा जाम लगता है। भिवंडी से ठाणे आने जाने के लिए वाहन चालकों और यात्रियों को 20 मिनट की यात्रा करने में इन दिनों ढाई से 3 घंटे का कष्टमय और कीमती समय बर्बाद करना पड़ रहा है। भीषण जाम में यात्रा करने में सबसे बड़ी कठिनाई  बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार लोगों को झेलना पड़ रहा है।

    जान जाने का भी खतरा 

    गंभीर रूप से बीमार मरीजों को लाने ले जाने वाली अत्यावश्यक सेवा की एंबुलेंस भी ट्रैफिक में फंसी रहती है, जिसके कारण कभी-कभी मरीजों के जान जाने का भी खतरा पैदा हो जाता है। इसके अलावा इस यात्रा के दौरान 20 किलोमीटर की दूरी में कहीं भी सुलभ शौचालय उपलब्ध न होने के कारण महिलाओं और बुजुर्गों को इसकी तकलीफ और शर्मिंदगी उठानी पड़ती है। ठीक इसी तरह मानकोली- अंजुर फाटा- भिवंडी से कामन रास्ते का भी कमोबेश यही बुरा हाल है।

    शहर का कोई मां बाप नहीं है

    भिवंडी के उत्तर दिशा में स्थित भिवंडी- वाड़ा रोड पर भी ट्रैफिक जाम की समस्या का बुरा हाल है। इस तरह देखा जाए तो भिवंडी शहर चारों तरफ से ट्रैफिक समस्या से बुरी तरह जकड़ा हुआ है। ऐसा लगता है कि भिवंडी शहर अपने आप में कैद होकर के रह गया है, इस शहर का कोई मां बाप नहीं है। आश्चर्य की बात है कि इस देश पर ट्रैफिक जाम की  समस्या से भिवंडी से लेकर ठाणे तक के सभी राजनैतिक दलों के नेताओं, सत्ताधारी दलों के मंत्रियों और पुलिस विभाग सहित पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों को इस बात की पूरी जानकारी होने के बावजूद इस समस्या का कोई हल नहीं निकल पाना यह शासन और प्रशासन की नाकामी को प्रत्यक्ष दर्शाता है।

    संख्या में हैवी वाहनों का आवागमन

    भिवंडी से बाहर नौकरी करने वाले लोगों के लिए आना-जाना अभिशाप बन गया है। ड्यूटी करने वाले लोगों को 20 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए अपने घरों से 4 घंटे पहले निकलना पड़ता है। ट्रैफिक जाम के कारण कई बार हुई सड़क दुर्घटनाओं में लोगों को जान माल का नुकसान उठाना पड़ रहा है। भिवंडी के चारों दिशाओं में लगने वाले ट्रैफिक जाम से कैसे छुटकारा मिलेगा इसकी कल्पना करना मुश्किल सा हो गया है ? इसके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार भिवंडी शहर के चारों तरफ बने हजारों की संख्या में बने वेयरहाउस और गोदाम हब है, जिसमें माल ले आने और ले जाने के लिए प्रतिदिन हजारों की संख्या में हैवी वाहनों का आवागमन  होता है।

    मुख्य बात तो यह है कि भिवंडी ठाणे हाईवे के बीचो बीच केंद्रीय पंचायत राज राज्यमंत्री कपिल पाटिल का निवास भी है, उन्हें भी कहीं आज में जाने के लिए इस समस्या से दो चार होना पड़ता है, उसके बावजूद भी इस रोड पर लगने वाले ट्रैफि जाम को लेकर प्रशासन के लोगो म जरा सा डर नहीं दिखाई पड़ रहा है तो आम लोगों को प्रतिदिन किस स्थिति से गुजारना पड़ता है, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।