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    भिवंडी: एसटी महामंडल कर्मियों की हड़ताल (ST Strike) से भिवंडी एसटी डिपो (Bhiwandi ST Depot) में स्टैंड पर खड़ी बसें धूल फांक रही हैं। भिवंडी एसटी डिपो को होने वाली प्रतिदिन की कमाई करीब 8 लाख हड़ताल की भेंट चढ़ रही है। हड़ताल के कारण अब तक करीब 3 करोड़ रुपए का नुकसान एसटी डिपो को हुआ है। हड़ताली कर्मचारियों की अनुपस्थिति की वजह से वेतन (Salary) भी महामंडल द्वारा रोक दिया गया है जिससे कर्मचारियों के खाने के लाले पड़ गए हैं।

    गौरतलब है कि एसटी महामंडल को विलिनीकरण किए जाने की मांग सहित अन्य प्रलंबित मांगों को लेकर महामंडल के कर्मचारी, चालक, कंडक्टर आदि काम बंद हड़ताल पर चले गए हैं। सरकार और एसटी कर्मचारियों की तनातनी के कारण 34 दिन के उपरांत भी हड़ताल टूटने के कोई आसार नहीं दिखाई पड़ रहे हैं। बसों की हड़ताल होने से यात्री आवागमन के लिए भारी कठिनाई झेल रहे हैं।

     एसटी बसें धूल फांक रही

    हड़ताल की वजह से भिवंडी एसटी डिपो में खड़ी करीब 80 बसें धूल फांक रही हैं। हड़ताल से एसटी डिपो का करीब 3 करोड़ों का नुकसान हुआ है। अधिकारियों के समझाने के बाद भी कर्मचारी काम पर लौटने को तैयार नहीं है। हड़ताली कर्मचारियों का वेतन काट लिया गया है। वेतन न मिलने से कर्मचारियों को खाने के लाले पड़ गए हैं, लेकिन कर्मचारी झुकने को तैयार नहीं है। डिपो में कार्यरत एक मकैनिक ने बताया कि 34 दिन से खड़ी बसों को फिर से रास्ते पर लाने के लिए भारी मेंटेनेंस की जरूरत होगी जिसमें लाखों रुपए खर्च होंगे।

    हड़ताल से यात्रियों को हो रही परेशानी

    एसटी महामंडल की करीब 80 बसें हड़ताल से बंद है। 362 कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं। भिवंडी डिपो से करीब 80 बसें प्रतिदिन कल्याण, ठाणे, वसई, विरार, नासिक आदि दूरदराज क्षेत्रों के लिए जाती थी जो पूर्णतया बंद होकर डिपो में खड़ी हैं। बसें बंद होने से ऑटो रिक्शा चालक यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। यात्री  मन मसोसकर मुंह मांगा किराया देने की मजबूरी झेल रहे हैं। 

    हड़ताल से महामंडल की टूटी आर्थिक कमर

    एसटी महामंडल के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हड़ताली कर्मचारियों की वजह से करीब 3 करोड़ रुपए का नुकसान भिवंडी एसटी डिपो का हुआ है। महामंडल पहले से ही भारी नुकसान में है। पहले कोरोना महामारी और अब हड़ताल की वजह से भारी नुकसान होने से महामंडल की आर्थिक कमर टूट गई है। डिपो अधिकारी के अनुसार एसटी कर्मचारियों द्वारा सरकार में विलीनीकरण की मांग पर सरकार को विचार करना चाहिए। एसटी महामंडल कर्मचारियों से स्टेट कर्मचारियों का वेतन करीब 40 परसेंट ज्यादा है। एसटी कर्मचारियों का वेतन बेहद कम होने से कर्मचारियों को जीवनयापन में भी तकलीफ होती है। कंडक्टर, ड्राइवर को 8 घंटे की ड्यूटी के बाद 15- 20 हजार रुपए ही मिलता है जो महंगाई के हिसाब से बेहद कम है। एसटी कर्मियों का वेतन कम होने की वजह से घर चलाना भी मुश्किल होता है। कर्मचारियों को पेंशन सुविधा भी नहीं है। ईपीएफ 95 स्कीम से ही पेंशन मिलती है जो रिटायर के बाद करीब 3 हजार रुपए ही मिलती है। 

    करीब 20,000 कर्मचारी काम पर लौटे 

    गौरतलब है कि समूचे प्रदेश में एसटी महामंडल के करीब 80 हजार से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर चले गए थे जिसमें करीब 20 हजार कर्मचारी काम पर लौट आए हैं। सरकार ने एसटी महामंडल  कर्मचारियों को काम पर लौटने को कहा है अन्यथा मेस्मा लगाने की चेतावनी दी है।