Eknath Shinde

    उल्हासनगर : शहर से निकलने वाले घनकचरे के  व्यवस्थापन पर उल्हासनगर महानगरपालिका (Ulhasnagar Municipal Corporation) करोड़ों रुपए खर्च करती है। एक ही स्थान पर गीला और सूखा कचरा (Wet and Dry Garbage) डाले जाने से डंपिंग ग्राउंड (Dumping Ground) परिसर से उठने वाली दुर्गंध से लोग परेशान है। जब तक नया डंपिंग ग्राउंड शुरू नहीं हो जाता तब तक मौजूदा ग्राउंड में ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग कर उस पर प्रक्रिया किए जाने के आदेश राज्य के नगरविकास मंत्री एकनाथ शिंदे (Minister Eknath Shinde) ने दिए है। जिससे दुर्गंध की समस्या का समाधान हो सके।

    उल्हासनगर महानगरपालिका क्षेत्र का कचरा स्थानीय कैम्प क्रमांक-5 में खदान परिसर में डाला जाता है। वैसे यह डंपिंग ग्राउंड अस्थायी डंपिंग है। कचरे के अलावा महानगरपालिका में मरने वाले जानवरों को भी यही डाला जाता था।  कचरा और मरे हुए जानवरों के कारण डंपिंग ग्राउंड परिसर के आसपास रहने वाले हजारों लोगों का जीना दुश्वार हो चुका है। 

    डंपिंग ग्राउंड को बंद करने कई बार हुआ आंदोलन

    महानगरपालिका के जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों, विविध एनजीओ ने मौजूदा डंपिंग को बंद कर उसको अन्यंत्र स्थलांतरित करने की मांग को लेकर समय-समय पर अपनी आवाज बुलंद की है और नगरसेवकों ने उल्हासनगर महानगरपालिका सदन में इस मुद्दे पर भी कई बार जोरदार चर्चा की है। अनशन और आंदोलन भी इसको हटाने के लिए हुए है। संयुक्त प्रयासों के चलते राज्य सरकार ने अंबरनाथ तहसील के उसाटणे गांव में डंपिंग ग्राउंड के लिए 30 एकड़ जमीन स्थानीय उल्हासनगर महानगरपालिका को आबंटित की है, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण यह मुद्दा अधर में है। 

    नगरविकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने मंत्रालय में बुलाई बैठक 

    जिले के पालक और राज्य के नगरविकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने ऊक्त मामले को गंभीरता से लेते हुए सोमवार को मंत्रालय में इस विषय को लेकर मीटिंग रखी थी। जानकारी के अनुसार मंत्री शिंदे ने स्थानीय महानगरपालिका के कमिश्नर डॉ. राजा दयानिधि को आदेश दिया है कि शहर में ही कचरे पर प्रक्रिया करने की योजना बनाकर उसको तत्काल लागू करें। उन्होंने कहा कि कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका की तर्ज पर उल्हासनगर महानगरपालिका भी  गीला औक सूखा कचरे को अलग कर उस पर प्रक्रिया कर फिलहाल दुर्गंध का समाधान कर  सकती है। वहीं क्षेत्रीय सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे ने भी बैठक में भाग लिया और उन्होंने भी कहा कि गीला और सूखा कचरा अलग कर उसपर प्रक्रिया करना समय की जरूरत है।

    उल्हासनगर में प्रतिदिन 360 मीट्रिक टन निकलता है कचरा 

    उल्हासनगर महानगरपालिका क्षेत्र का कचरा उठाने का काम कोणार्क कंपनी के पास है जिसकी मियाद  दिसंबर 2021 है। उल्हासनगर महानगरपालिका क्षेत्र में रोजाना तकरीबन 360 मीट्रिक टन निकलता है। जिसमें लगभग 200 टन गीला 160 मीट्रिक टन सूखा होता है।