The churning phase started for the municipal elections

    उल्हासनगर. स्थानीय महानगरपालिका (Local Municipal Corporation) के वर्तमान जनप्रतिनिधियों (Public Representatives) का कार्यकाल आगामी फरवरी में पूरा होने जा रहा है। महानगरपालिका चुनाव (Municipal Elections) को लेकर सभी राजनीतिक दलों (Political Parties) ने अपने – अपने स्तर पर चुनावी तैयारियां शुरू कर दी है।

    पिछला महानगरपालिका चुनाव में उम्मीदवारों ने  पैनल पद्धति से लड़ा था। पिछले महीने तक यह था कि सिंगल वार्ड के अनुसार महानगरपालिका के चुनाव होंगे लेकिन इस बीच राज्य कैबिनेट ने बुधवार 22 सितंबर को कैबिनेट की बैठक में अपना ही निर्णय बदलते हुए आगामी महानगरपालिका चुनाव पूर्व की तरह ही पैनल सिस्टम से कराए जाने का फैसला लिया। इस  घोषणा से चुनाव लड़ने के इच्छुकों को अब अपनी चुनावी रणनीति में बदलाव करना पड़ रहा है और चुनावी समर में उतरने की कतार वालों ने अब मंथन शुरू कर दिया है।

    पैनल में काफी मेहनत करनी पड़ती है

    वहीं उल्हासनगर महानगरपालिका के आम चुनाव सिंगल वार्ड पद्धति के मुताबिक ही हो ऐसी इच्छा भी अनेक शहरवासियों की है। सर्वसामान्य वर्ग से आने वाले और समाज अर्थात अपने प्रभाग में लोगों के बीच जाकर सुख दुःख का काम करने वालों को सिंगल वार्ड पैटर्न काफी सुविधाजनक महसूस लग रहा था। पैनल पद्धति से पैसा, समय बर्बाद होने की बात भी दबी जुबान से लोग कर रहे है।  पैनल पद्धति में आम जनता का कहना क्या है। ऊक्त विषय पर चर्चा करने के लिए शनिवार की शाम को कैंप क्रमांक 3 स्थित सिंधु युथ सर्कल में  संभावित कुछ उम्मीदवारों और उल्हासनगर के एनजीओ की बैठक आयोजित की गई थी। वैसे बड़े राजनीतिक दल तो हर पद्धति के लिए तैयार रहते है लेकिन उनके उम्मीदवार को पैनल में काफी मेहनत करनी पड़ती है।

    सिंगल वार्ड से ही हो सकती है

    जानकारी के अनुसार उक्त चर्चा में कायद्याने वागा नामक सामाजिक संस्था के संस्थापक राज असरोंडकर, अधिवक्ता राज चांदवानी सहित  अन्य एनजीओ के पदाधिकारियों ने हिस्सा लेकर पैनल और सिंगल वार्ड के अंतर पर चर्चा की लेकिन इस बैठक में सभी लोगों में पैनल सिस्टम को नकारते हुए कहा कि वास्तव में यदि वार्ड के विकास की बात की जाए तो वह सिंगल वार्ड से ही हो सकती है। कायद्याने वागा के  राज असरोंडकर और अधिवक्ता राज चांदवानी के विशेष मार्गदर्शन में आयोजित मंथन बैठक में पैनल सिस्टम का कानूनी दायरे में किस तरह विरोध किया जाए इसपर लंबी चर्चा हुई।

    उक्त विषय पर सरकार, राज्यपाल महोदय या न्यायालय का सहारा लेकर बदलाव लाया जा सकता है क्या इस बात पर चर्चा हुई। अधिवक्ता चांदवानी के मुताबिक संविधान की धारा 73 और 74 अमेंडमेंट में सत्ता का विकेंद्रीकरण हों, जो नगर पालिका, महानगरपालिकाओं और पंचायतों को और अधिकार संपन्न बनाने के लिए अधिनियम के 73वें और 74वें संविधान संशोधन का सहारा लेकर शासन प्रशासन से छोटे वार्ड और अधिक उम्मीदवार यह संविधानिक अधिकार होने के नाते गुहार लगाई जा सकती है। वार्ड पद्धति, पैनल कैसे बनता है, हमारे अधिकार क्या है, चुनावप्रणाली में कैसे काम करना है इन सब विषयों पर मंथन हुआ।