बापू कुटी, परमधाम आश्रम प्रेरणास्थल; देश-विदेश के यात्रियों का लगा रहता है तांता

    वर्धा. देश की आजादी की लड़ाई में केंद्र रही सेवाग्राम स्थित बापू कुटी एवं भूदान आंदोलन के प्रणेता विनोबा भावे का सेवाग्राम स्थित परमधाम आश्रम वर्षों से प्रेरणास्थल बना हुआ है़  देश-विदेश के पर्यटक प्रति वर्ष यहां बड़ी संख्या में भेंट देते आ रहे है़ं  भले ही कोरोना की वजह से पर्यटकों की संख्या कम हुई हो, किंतु बापू कुटी एवं परमधाम आश्रम की वजह से जिले को ऐतिहासिक महत्व प्राप्त है.

    एक संकल्प की वजह से वर्धा रहने आए थे गांधी

    महात्मा गांधी महज एक संकल्प की वजह से वर्धा रहने चले आए थे. दरअसल, 1930 में साबरमती आश्रम से दांडी यात्रा पर निकले गांधी ने ये संकल्प लिया था कि वे तभी आश्रम वापस लौटेंगे जब अंग्रेजों से देश आजाद करा लेंगे. इस बीच तीन वर्ष तक वे जेल और आंदोलनों में व्यस्त रहे़ चूंकि आजादी मिली नहीं तो वे साबरमती नहीं लौटे और ये सोचने लगे कि मध्यभारत में कहीं अपना आश्रम बनाए़  जमनालाल बजाज के आग्रह पर बापू 1934 में वर्धा आए थे़  पहले वे शहर के बीचोंबीच, मगनवाड़ी में रहा करते थे़  इसके बाद 1936 में सेवाग्राम चले गए़  यह गांव वर्धा से करीब 8 किमी दूर है.

    ‘बापू कुटी आश्रम’ महात्मा गांधी से जुड़ा देश का संभवत: इकलौता आश्रम है, जहां तमाम चीजें आज भी जस की तस हैं. यानी वर्षों पहले जैसा वे छोड़कर गए थे, करीब-करीब वैसा ही यह भी बता दें कि 30 जनवरी 1948 को उनकी हत्या न हुई होती तो वे वर्धा आते, उनका रेल टिकट भी बुक था़ 

    सामाजिक परिवर्तन आंदोलनों का साक्षी 

    1937 में पवनार में परमधान आश्रम की स्थापना की गई़  आश्रम के समक्ष धाम नदी के विशाल पात्र होने के साथ ही पर्यावरणीय सौंदर्य प्राप्त है़  1940 में गांधी द्वारा विनोबा को व्यक्तिगत सत्याग्रही होने का पहला बहुमान दिया़  उपरांत विनोबा द्वारा परमधाम आश्रम से अपने सत्याग्रह को शुरूआत की़  विनोबा के कहने पर 1981 में सर्वत्र गोवंशहत्या बंदी का आंदोलन शुरू हुआ. आश्रम के निर्माण कार्य समय यहां मूर्तियां मिली थी़  भरत व राम भेंट प्रसंग पर आकर्षक प्राचीन मूर्तियां आश्रम में देखने मिलती है़  आश्रम में प्रार्थना में शुरूआत होती है़  आश्रम पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है.  

    सेवाग्राम विकास प्रारूप के तहत विकास कार्य

    जिले में पर्यटन विकास के दृष्टिकोण से सेवाग्राम विकास प्रारूप के अंतर्गत सरकार की ओर से बड़े पैमाने पर विकास कार्य किये जा रहे है़ं  इसके माध्यम से महात्मा गांधी, विनोबा के कार्यों की पर्यटकों अनुभूति हो इस दृष्टिकोण से प्रयास जारी है़  सेवाग्राम विकास प्रारूप के अंतर्गत संपूर्ण विकास कार्य पूर्ण होने पर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा निश्चित ही रोजगार के अवसर स्थानीय लोगों को उपलब्ध होगा.