बुद्ध पूर्णिमा में प्राणियों गणना, जंगल में मचान व जलकुंड तैयार

    सेलु (सं). प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी बुद्ध पूर्णिमा के दिन सोमवार को वन्यप्राणियों की गणना बोर बाघ प्रकल्प में की जाने वाली है़  इस दौरान निसर्ग अनुभव के लिए तैयारी पूर्ण हुई है़ वन्यप्राणी गणना मचान पर बैठकर की जाएगी़  जिससे कृत्रिम जलकुंड की मरम्मत तथा मचान तैयार करने का कार्य शुरू होने की जानकारी बोर (वन्यजीव) परिक्षेत्र अधिकारी जी़ एस़ राठोड़ ने दी. 

    जिले का तापमान निरंतर बढ़ते जा रहा है़ प्यास बुझाने के लिए वन्यप्राणी पानी की तलाश करते हैं.  जंगल के अधिकांश जलस्त्रोत सूख जाने से जानवरों को पानी उपलब्ध करने नए जलकुंड तैयार किए हैं. बोर बाघ प्रकल्प में ऐसे कुल 52 जलकुंड है़  जहां पर बोर बांध तथा नवरगांव तालाब के कारण पानी उपलब्ध है.

    उक्त जलस्त्रोतों के पास स्थित मचान पर 24 घंटे बैठकर प्र गणना की जाएगी़  इस बारे में वन्यवजीव विभाग की वेबसाइट पर विस्तृत जानकारी दी गई है, ऐसा जी़ एस़ राठोड़ ने बताई  प्रादेशिक वनक्षेत्र में जिला उपवन संरक्षक राकेश सेपट, सहा़ वनसंरक्षक गजानन  बोबड़े के मार्गदर्शन में जिले के वनपरिक्षेत्र अधिकारी,  वनक्षेत्रपाल, वनरक्षक  व वनविभाग की टीम कार्यरत है.  

    संपूर्ण जिले में वन्यप्राणी गणना  

    मानद वन्यजीव रक्षक संजय इंगले तिगांवकर ने कहा कि बोर बाघ प्रकल्प के साथ ही जिले के संपूर्ण वनपरिक्षेत्र में बुद्ध पूर्णिमा के दिन बाघ गणना होती है़ इसके लिए जिला वन विभाग की ओर से कृत्रिम जलकुंड की मरम्मत तथा निर्मिति की गई है़ जलस्त्रोतों के पास मजबूत मचान तैयार की गई है़ प्रादेशिक वनक्षेत्र में भी लगभग 50 जगह वन कर्मचारियों के साथ वन्यजीव अभ्यासक इस गणना में शामिल होंगे़ वन्यप्रेमियों को वन व वन्यजीवों से जोड़नेवाला यह उपक्रम है.

    इस प्रसंग पर जलस्त्रोतों का संरक्षण करना, आवश्यक मरम्मत, जरूरत के अनुसार जलकुंड तैयार करना, निरंतर जलापूर्ति शुरू रखना आदि पर अमल किया जाता है़  जंगल में सहज रूप से पानी उपलब्ध रहने पर वन्यप्राणी गांवों की ओर नहीं आते़  निसर्गानुभव यह उपक्रम केवल पर्यटन बनकर न रहे, इसका लाभ वन्यजीवों तथा अभ्यासकों को परस्पर पूरक बनना चाहिए.