Soyabean, Tur and Cotton Crop

    वर्धा. लगातार बारिश के चलते खरीफ मौसम की सोयाबीन, तुअर व कपास की फसल संकट में आ गई हैं. ऐसी ही बारिश चलती रही तो किसानों पर संकट के बादल और गहराने की आशंका प्रबल हो गई है. बारिश के कारण सोयाबीन की फल्लियां अंकुरने लगी है. वहीं कपास की फसल पर मर रोग का आक्रमण बढ़ गया है. मौसम विभाग ने सप्ताहभर बारिश जारी रहने की संभावना जताने के कारण आगामी दिनों में किसानों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका है़ इस वर्ष मौसम का मिजाज अलग ही रहा है.

    अगस्त में बारिश की बेरूखी के चलते फसल संकट में आ गई थी. बांधों का जलस्तर नहीं बढ़ने से ग्रीष्मकाल में जलसंकट के आसार गहरा गए थे. परंतु अगस्त के अंतिम दिनों में बारिश ने दमदार वापसी की, जिससे किसानों सहित सभी की आशाएं पल्लवित हुई थी. वहीं सितंबर में बारिश का प्रकोप निरंतर कायम रहा. बीते 10 दिनों से लगातार कभी रिझझिम तो कभी मूसलाधार बारिश हो रही है, जिससे जिले के छोटे व बड़े सभी बांध लबालब होने के कारण बांधों से भी पानी छोड़ा जा रहा है. एक और बारिश व दूसरी ओर बांधों से पानी छोड़े जाने कारण के नदी तट की खेती पूर्णत: खतरे में आ गई है.

    खेत हुए जलमग्न, किसानों को परेशानी 

    निरंतर बारिश के कारण खेत में पानी जमा होने के कारण खेतों ने तालाब का स्वरूप धारण किया है. शुक्रवार की रात भी जिले में रिमझिम बारिश हुई, जिससे खेत में और पानी जमा हुआ है. कपास की फसल निरंतर पानी में रहने के कारण तथा अधिक बारिश होने से फसल पर मर रोग का प्रकोप बढ़ने के साथ ही फफूंद ने भी आक्रमण किया है.

    खेतों में सड़ने लगे कपास के बोंड

    कपास के पौधे पर 45 दिनों के बाद कलियां आती है. इसके बाद फूल आकर फल में रूपांतरण होने के लिये करीब 70 दिनों का समयावधि लगता है. जिले में इस वर्ष प्री-मानसून के साथ मृग नक्षत्र में 12 जून के पूर्व सैकड़ों हेक्टेयर में कपास की बुआई हुई है, जिससे कपास के पौधे ने फल धारणा की है. परंतु निरंतर बारिश के कारण फल काले होकर सड़ने लगे हैं. किसानों के अनुसार शुरू में लगने वाले फल महत्वपूर्ण होते है. उसका वजन अधिक होता है. दशहरे के पूर्व कपास घर तक पहुंचता है, लेकिन फल तेजी से सड़ने के कारण किसानों का नुकसान हो रहा है.

    सोयाबीन की फसल पर इस बार भी ग्रहण

    सोयाबीन की फसल 90 से 105 दिनों तक परिपूर्ण होती है. जिले में 80 प्रतिशत फसल का यह पीरियड समाप्त होने की कगार पर है. सोयाबीन फल्लियों में दाना पकने के कारण फसल पीली पड़ने लगी है. आने वाले एक पखवाड़े के बाद फसल कटाई पर आ सकती है. परंतु बारिश के कारण जो दाने पके है. उसमें से अंकुर निकलने लगे है. बारिश और सप्ताहभर चली तो यह समस्या और बिकट हो सकती है. बीते वर्ष इल्लियों तथा बारिश के कारण सोयाबीन की फसल हाथ से निकल गई थी. इस वर्ष भी यह खतरा मंडरा रहा है.

    तुअर फसल भी हो रही बुरी तरह प्रभावित

    तुअर की फसल पर भी बारिश का प्रभाव हो रहा है. इस वर्ष जिले में तुअर का क्षेत्र बढ़ा है. तुअर की फसल पानी में रहने के कारण पौधों को अन्नद्रव्य नहीं मिलने से तुअर पर मर रोग का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है.

    सेलू व आर्वी में वर्षा से भारी नुकसान

    सितंबर के पहले सप्ताह में हुई बारिश से जिले अतिवृष्टि व बाढ़ से हुए नुकसान की प्राथमिक रिपोर्ट सामने आयी़  इसमें सर्वाधिक 13 गांवों में 98.80 हेक्टेयर नुकसान सेलू तहसील में बताया गया़  वहीं आर्वी तहसील के दस गांवों में कपास, तुअर, सोयाबीन, मिर्च, गन्ना, केला आदि फसलों का नुकसान हुआ है. कुल 23 गांवों में 161 हेक्टेयर में नुकसान दर्ज किया गया़  अंतिम रिपोर्ट में यह नुकसान बढ़ने की आशंका है.