Pulgao Cotton Mill, Ganeshotsav

    पुलगांव. विघ्नहर्ता श्रीगणेशोत्सव की रौनक जो शहर में लगती थी और बड़े उत्साह से कई मंडलों द्वारा आकर्षक झाकियां, गुफाएं साकार करके विभिन्न कार्यक्रम, लकी ड्रा का बड़े पैमाने पर आयोजन किया जाता था़  तब पुलगांव काटन मिल का मुख्य आकर्षण रहता था़  जो सालभर तो अपने कार्य के कारण बंद रहता था‍. वहीं गणेशोत्सव के दस दिन के लिए विभिन्न आकर्षक झांकियों के साथ पुणे से लाई गणेश प्रतिमा के दर्शन के लिए आम नागरिकों के लिए रात्री में खुला कर दिया जाता था.

    मिल के मालिक में हनुमानप्रसाद नेवटीया को गणेश पर अपार आस्था थी़  उन्होंने 1939 से गणेशोत्सव धूमधाम से मनाने को शुरूआत की़  इस कारण मिल में उत्पादित कपड़े के ऊपर पीसीएम के साथ गणेश की छाप रहती थी. मिल के कारण यहां गणेशोत्सव महाराष्ट्र में दूसरे क्रमांक पर आ गया था.

    अपार भीड़ का मुख्य कारण था की आसपास के 200 से अधिक देहातों के नागरिक यह उत्सव देखने अपने परिवार के साथ आते थे़  शहर में रहने वाले परिवारों के घरों में बाहरगांव से मेहमान के साथ बहन बेटियां बड़े ही उत्साह से यहां का गणेशोत्सव देखने आते थे़  इस कारण शहरभर में रौनक देखने को मिलती और कई नागरिकों को उत्सव में अच्छा खासा रोजगार भी मिलता था. 

    एक माह का लगता था मीना बाजार 

    गणेशोत्सव शुरू होने के पहले ही शहर के सर्कस ग्राउंड में मेला लगता था, जिसमें सर्कस, विभिन्न आकर्षक झूले, कुत्ते, गधे, जादुई खेल आकर्षण रहते थे़  साथ ही दूरदराज के विभिन्न दूकानदार बच्चों के खिलौने, क्राकरी खाद्य प्रकार के विभिन्न स्टाल काटन मिल से सर्कस ग्राउंड तक रात में रौनक लगी रहती है़  साथ ही गाड़ियों पर अपना व्यापार करने वाले फल्ली, पेढ़ा, चाट के दूकानदार व्यापार कर अपने परिवार का गुजर बसर करते और शहर भर में रौनक बनी रहती थी. 

    कई मंडलों ने की गणेश मूर्ति की स्थापना 

    काटन मिल के साथ शहर में करीब 25 से 30 सार्वजनिक गणेश मंडलों की ओर से गणेश मूर्ति की स्थापना की जाती़  जहां स्थापना के साथ नागरिकों को दिखाने के लिए गुफाएं तैयार की जाती थी़  मंडलों के सामने बड़ी-बड़ी झांकियां विभिन्न प्रकार गायक भजन आदि के साथ प्रसाद महाप्रसाद के अलावा कई सांस्कृतिक कार्यक्रम रखकर अपनी श्रद्धा भावना से गणेश मूर्ति के सेवा व आराधना करते थे़  एक-एक मंडल गणेश मूर्ति को ट्रैक्टर, ट्रक में बिठाकर अपनी झांकियां व नगाड़ों के साथ निकलकर स्टेशन चौक पहुंचकर शहर की परिक्रमा करके नाच गाने के साथ घूमती थी.  

    रातभर लगी रहती थी विसर्जन की धूम

    आखिर में बड़े ही सुशोभित पांच घोड़े के रथ पर गणेश की मूर्ति सवार होकर पुलगांव, काटन मिल से निकलते थे. मन भावन झांकियां और चालीसगांव की बैंड पार्टी के साथ सुरक्षा कर्मचारी अपनी वेशभूषा के साथ निकलते थे़  उत्साह देखने हजारों लाखों में नागरिक आते थे़  शहर की परिक्रमा के साथ मिल का बैंड पथक गांधी चौक में अपनी कलात्मक धुन बजाकर नागरिकों का मन मोह लेता था़  इन सब कार्यक्रम को सुबह हो जाती थी. आखिरकार वर्धा नदी के वशिष्ठा में सभी मूर्तियों का विसर्जन महाआरती के बाद किया जाता था़  

    काटन मिल बिकने पर श्रीगणेश की नाराजगी

    पुलगांव काटन मिल को राजनीतिक दबाव में बहुत कम दाम में बेच दिया गया. यहां से शहर के गणेशोत्सव की रौनक धीरे-धीरे कम हो गई़  वहीं सार्वजनिक गणेश मंडलों की संख्या भी कम हो गई़  मिल बंद होने से 1,500 कामगार बेरोजगार हो गए़  व्यापार व्यवसाय मंदा हो गया़  ऐसा लग रहा है कि पुलगांव शहर से श्रीगणेश नाराज हो गए है़ं  उस पर कोरोना संकटकाल के कारण पिछले 2 साल से तो न ही मेला लगा न ही किसी प्रकार के बैंड बाजो की धुन श्रीगणेश को सुनाई दी. अब कुछ ही सार्वजनिक मंडल रह गए हैं.