जनसुनवाई में फुटा किसानों का गुस्सा, प्रशासन के अधिकारी रहे नदारद

    • सडक नहीं तो जमीन नहीं का निर्णय

    वर्धा/विरुल. समृध्दि महामार्ग के बाद अब जिले में नागपुर-मुंबई हाईस्पीड बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट प्रस्तावित है़ इस संबंध में चर्चा के लिए जिप सभागृह में आयोजित जनसुनवाई में किसानों का गुस्सा फुट पडा़ जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में नदारद रहे़ उपस्थित किये गए प्रश्नों के जवाब न मिलने से किसानों ने असंतोष व्यक्त किया़ साथ ही खेतो में जाने के लिए सडक नहीं तो इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन भी नहीं मिलेंगी, ऐसा निर्णय किसानों ने जनसुनवाई में लिया़ 

    बता दें कि, केंद्र सरकार की ओर से नागपुर-मुंबई बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है़ इसके लिए सलाहगार एजन्सी के रुप में जीपीएस टेक्नॉलॉजी प्रा़ लि. की नियुक्ती की गई है़ वर्धा, सेलू व आर्वी तहसील के करिब 34 गांवों से यह ट्रेन गुजरेंगी़ जिले में वर्धा व पुलगांव में दो स्टापेज दिये गए है़

    केंद्र व राज्य सरकार का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट नेशनल हाईस्पीड रेल कार्पोरेशन लि. द्वारा पुर्ण किया जाएगा़ नागपुर-मुंबई बुलेट ट्रेन के मार्ग की दूरी 753 किमी रहेगी़ यह ट्रेन 250 किमी रफ्तार से दौडेंगी़ इस प्रोजेक्ट में जिले के 3 तहसीलों के कुल 34 गांव बाधीत होंगे़ पांढरकवडा व पुलगांव में दो स्टापेज की संभावना है़ प्रोजेक्ट के लिए जिले में कुल 106.96 हेक्टयर जमीन का अधीग्रहन होगा़ इसमें करिब 364 प्लाट बाधीत होंगे, ऐसी जानकारी है़.

    इस प्रोजेक्ट के संबंध में क्षेत्र के किसान, गांवों के सरपंच व नागरिकों से चर्चा के लिए सोमवार की सुबह 11 बजे जिप के सभागृह में जनसुनवाई रखी गई थी़ बैठक में प्रोजेक्ट के अधिकारी श्याम चौघुले, प्राजक्ता कुलकर्णी, प्रदीप बरगे व प्रशासन से उपजिलाधिकारी (भूसंपादन) मनोजकुमार खैरनार उपस्थित थे़ बैठक में सेलडोह, खडकी, धोंडगांव, आमगांव, कोटंबा, केलझर, इटाला, किन्हाला, धानोली, मोहनुपर, कान्हापुर, गोंदापुर, सुरगांव, वानोडा, केली, विरुल, डोर्ली सहित कुछ गांवों के सरपंच व किसान भी शामील हुए थे़.

    उपस्थितों ने संबंधीत प्रोजेक्ट के बारे में किसानों को मार्गदर्शन व प्राथमिक जानकारी दी़ इसके बाद उपजिलाधिकारी खैरनार जनसुनवाई से निकल गए़ इसके बाद किसानों के सवाल सुनने के लिए प्रशासन से एक भी जिम्मेदार अधिकारी उपस्थित नहीं था़ परिणामवश किसानों ने अपना रोष व्यक्त किया़ 

    सरपंच व किसानों ने लगाई सवालो की झडी

    जनसुनवाई में सरपंच व किसानों ने उपस्थित अधिकारियों पर सवालों की झडी लगा दी़ समृध्दि महामार्ग का अनुभव हमारे लिए काफी बुरा रहा़ इस बार ऐसा नहीं होने देंगे़ बाधित होनेवाली सडक व खेती का क्या होंगा, हमें मुआवजा किस नियम के अनुसार मिलेगा, जमिन अधिग्रहन में किसानों से धोखाधडी नहीं होनी चाहिए, रोजगार की समस्या, जिनकी जमीन अधिग्रहित होंगी,उसी परिवार के एक सदस्य को गुणवत्ता के आधारपर रोजगार पर क्या उपाययोजना है़

    इन सवालों से उपस्थित अधिकारी निरुत्तर रहे़ हम केवल प्राथमिक जानकारी लेने यहां आये हैं, आपकी सूचना व अभिप्राय वरिष्ठों को पहुंचाई जाएंगी़ हमारा इस प्रोजेक्ट को विरोध नहीं है, परंतु किसानों से खिलवाड नहीं होना चाहिए़ खेतो में जाने के लिए सडक का निर्माण होना चाहिए, सभी सवालों पर जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलता तब तक हम हमारी जमीन नहीं देंगे, ऐसा निर्णय ही जनसुनवाई में किसान व सरपंचों ने लिया़ विरुल के सरपंच एड. दुर्गाप्रसाद मेहरे, निजामपुर के सरपंच प्रवीण वैद्य, हुसेनपुर के सरपंच रवि कुरसंगे, पिंपलगांव के सरपंच सागर अडाऊ, श्याम नाले, विक्रांत नाले, चव्हाण आदि ने भी प्रश्न उपस्थित किए़ 

    इन मुद्दों पर हुआ मार्गदर्शन

    प्रोजेक्ट के अधिकारियों ने उपस्थितों को विभिन्न मुद्दों पर मार्गदर्शन किया़ जमीन का अधिग्रहन, शहरी व ग्रामीण क्षेत्र का मूल्यांकन, पर्यावरण को क्षति न पहुंचे इस लिए उपाययोजना, वृक्षों की कटाई के बाद पौधारोपन का विकल्प, वन्यजीओ को परेशानी न हो इस लिए ठोस कदम उठाये जाएंगे़ जीस क्षेत्र में वन्यजीओ का विचरण हैं, वहां रात्रि के समय काम नहीं होंगा़ टनेल निर्माण के दौरान निकलनेवाले मलबे का उचित प्रबंधन, काम के लिए आधुनिक संसाधनो का उपयोग, ध्वनी व पर्यावरण प्रदूषण न हो इसका ध्यान रखा जाएंगा़ परिवहन नियमों का पालन सहित अन्य सभी पैलुओं पर प्राथमिक जानकारी दी गई़  

    तैयार होंगा डीपीआर

    क्षेत्र के किसान अपने अभिप्राय व सूचना लिखित तौर पर पेश करें.इसकी डिटेल्स प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर सेंट्रल रेलवे की ओर पेश की जाएगी़ किसानो की समस्या सुनने के लिए आगामी दिनों में फीर एक जनसुनवाई ली जाएगी़ परिवहन की समस्या टालने प्रारुप तैयार किया जाएगा, ऐसी जानकारी प्रोजेक्ट के अधिकारियों ने दी़.