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  • ग्राहक पर पड़ेगा बोझ, प्लॉस्टिक का बढ़ेगा उपयोग

वर्धा. फूड एन्ड ड्रग विभाग ने खाद्य तेल बिक्री के संदर्भ में नई गाइड लाइन जारी करने का निर्णय लिया है. इस संदर्भ में गुरूवार को विभाग के अधिकारियों ने विक्रेताओं के साथ ऑनलाइन मीटिंग लेकर खुला तेल बेचने पर पाबंदी लगाने की जानकारी दी. सरकार के इस निर्णय पर व्यापारियों ने आपत्ति जताई है. वही पैकिंग तेल के कारण ग्राहकों पर भी अतिरिक्त बोझ पड़ने वाला है.

किराना दूकान तथा तेल गिरणी से खुले में तेल बेचा जाता है. बरसों से यह सिलसिला चला आ रहा है, परंतु तेल में मिलावट व अन्य कारणों के चलते सरकार ने खाद्य तेल के लूज बिक्री पर पाबंदी लगाने का निर्णय लिया है. गुरूवार को  फूड एन्ड ड्रग विभाग के अधिकारी दत्तात्रय सालुंके व योगेश धने की उपस्थिति में व्यापारियों की बैठक ली गई. जिससे व्यापारियों को सूचना दी गई है कि वह खाद्य तेल की लूज में बिक्री न करें. परिणामवश व्यापारियों को पैकिंग तेल ही बेचना होगा. 

डिब्बे व ड्रम का तेल बेचा जाता है

वर्तमान में किराना दूकान से डिब्बे का अथवा ड्रम में से तेल निकालकर वह लूज में बेचा जाता है. ग्राहक अपनी आवश्यकता अनुसार तेल खरीदता है. मजदूर तथा ग्रामीण क्षेत्र में लूज तेल का उपयोग अधिक मात्रा में किया जाता है. दूकानदार डिब्बे अथवा ड्रम से तेल निकालकर ग्राहक को बेचता है.

पैकिंग के कारण बढ़ेगा रेट

सरकार के निर्णय के कारण तेल विक्रेताओं को खाद्य तेल की पैकिंग करना अनिवार्य होगा. वर्तमान में 250 ग्राम से लेकर 500 ग्राम व उससे अधिक का तेल पैकिंग में आता है, परंतु अब दूकानदार को मजदूर व अन्य ग्राहकों का विचार कर उसके अनुसार पैकिंग में खाद्य तेल उपलब्ध करना होगा. परिणामवश पैकिंग पर खर्च बढ़ने के कारण ग्राहक को उसका बोझ उठाना पड़ेगा. साथ ही प्लॉस्टिक उपयोग भी बढ़ेगा.

सरकार का निर्णय गलत

पैकिंग में खाद्य तेल देना यह सरकार का निर्णय गलत है. मजदूर वर्ग उनकी आवश्यकता अनुसार लूज तेल खरीदते हैं. 50 ग्राम से 250 ग्राम तक तेल अनेक मजदूर खरीदते हैं. लूज तेल सस्ता होने के कारण उसे खरीदने को प्राथमिकता देते हैं. लूज तेल बेचने पर कार्रवाई होगी ऐसा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है. सरकार का यह निर्णय सभी मायने से गलत है. तेल में मिलावट होने पर विभाग ने जांच कर दोषी पर कार्रवाई करनी चाहिए, परंतु ऐसा निर्णय नहीं लेना चाहिए.

-इद्रीस मेमन, सचिव व्यापारी एसोसिएशन, वर्धा

गरीबों पर होगा अन्याय

अधिकारी व सरकार अपनी मनमानी कर रहे हैं. उन्होंने ग्राउंड स्तर पर जाकर देखना चाहिए. मजदूर वर्ग अपने आर्थिक पूंजी को देखकर तेल खरीदता है. 5 रूपये से लेकर 10 रूपये तेल वह लेकर जाता है. पैकिंग के कारण प्लॉटिक का कचरा और बढ़ेगा. जिसका असर पर्यावरण पर भी होगा. मीटिंग यह सब  बातें हमने रखकर हमने विरोध किया. सरकार को इस निर्णय पर सोचना चाहिए.

-अनिस घांची, सचिव वर्धा आइल एंड मर्चंट एसोसिएशन