bad impact on the business of Ganesh idols in Maharashtra
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    वर्धा. जिले में श्री गणेशोत्सव बड़े ही धूमधाम व सोत्साह के साथ मनाया जाता है़  वहीं इस बार गणेशोत्सव पर महंगाई का असर देखने मिल रहा है. स्थानीय मूर्तिकार नागपुर जिले के सावरगांव से गढ़ी मिट्टी तथा जिले में प्राप्त होने वाली सफेद मिट्टी का प्रतिमा तैयार करने के लिए उपयोग करते है़  परंतु पेट्रोल, डीजल का मूल्य बढ़ने से मूर्तिकारों को लगने वाली मिट्टी भी इस बार 20 फीसदी तक महंगी हुई है़  परिणामवश आर्थिक समस्या से जूझ रहे जिले के मूर्तिकारों में चिंता छायी हुई है़  बता दें कि कोरोना महामारी के कारण गत वर्ष की भांति इस बार भी सरकारी दिशानिर्देश के तहत गणेशोत्सव मनाया जाएगा़ 

    4 फीट ऊंची प्रतिमा तैयार करने की अनुमति 

    सरकार ने सार्वजनिक गणेश प्रतिमा 4 फीट से ऊंची न बनाने के निर्देश दिए है़  इस कारण सार्वजनिक गणेश मंडल व मूर्तिकारों ने पहले ही निराशा व्यक्त की है़  घरेलू गणेश प्रतिमा में मूर्तिकारों को अधिक मुनाफा नहीं मिलता़  परंतु सार्वजिनक गणेश मंडलों की बड़ी प्रतिमा के आर्डर से मूर्तिकारों को अच्छा मुनाफा मिलता है़  वहीं सरकारी गाइडलाइन के कारण मूर्तिकारों में मायूसी छायी हुई है़  कोरोना संकट के चलते इस बार मूर्तिकारों ने कम गणेश प्रतिमा निर्माण करने की जानकारी है़ 

    2 प्रकार की मिट्टी का किया जाता है उपयोग

    जिले के अधिकांश मूर्तिकार नागपुर जिले के सावरगांव से गढ़ी की मिट्टी बुलाते है़  मिट्टी अच्छी क्वालिटी की होने से प्रतिमा बनाने में आसानी होती है़  वहीं कुछ मूर्तिकार जिले में प्राप्त होने वाली सफेद (जनरल) मिट्टी का उपयोग करते है़  इसकी कीमत सावरगांव की मिट्टी से थोडी कम है़  स्थानीय मूर्तिकार दो प्रकार की मिट्टी का ही अधिक उपयोग करते है़

    एक से डेढ़ हजार रुपए तक दर में हुई बढ़ोतरी 

    पेट्रोल, डीजल का मूल्य काफी बढ़ने से मिट्टी के ट्रान्सपोर्ट का खर्च भी बढ़ गया है़  गत वर्ष सावरगांव की डेढ़ सौ फीट मिट्टी 8 हजार 500 रुपए में मिलती थी, जिसकी कीमत इस वर्ष 10 हजार रु़  हुई है़ वहीं जिले में प्राप्त होने वाली सफेद मिट्टी एक ट्राली की कीमत 6 हजार थी, जो इस वर्ष 7 हजार रुपए हुई है़  ट्रान्सपोर्ट का खर्च बढ़ने से मूर्तिकारों को मिट्टी की खरीदारी के लिए अधिक मूल्य चुकाना पड़ रहा है़  महंगाई के कारण प्रतिमा को लगने वाले रंग भी महंगे हो गए है़ 

    POP की प्रतिमा से पर्यावरण को है नुकसान

    उल्लेखनिय है कि सरकार की ओर से पीओपी की गणेश प्रतिमा पर पाबंदी लगाने के बावजूद भी हर साल जिले में इसकी बिक्री होती है़  कोई भी व्यक्ति बाहर से पीओपी का माल बुलाकर इसकी बिक्री करता है़ परिणामवश जिले के करीब डेढ़ सौ कुम्हारों को नुकसान उठाना पड़ता है़  पिछले 20 वर्षों से यह मांग हो रही है़  परंतु प्रशासन की उदासीनता के कारण किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं होती़  इस बार प्रशासन गंभीरता से ध्यान देकर पीओपी की मूर्ति बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग स्थानीय मूर्तिकारों ने प्रशासन से की है़ 

    मूर्ति के निर्माण में जरूरी मिट्टी हो गई महंगी 

    दिन-ब-दिन महंगाई बढ़ती जा रही है़  इसका असर हमारे व्यवसाय पर भी हो रहा है. ट्रान्सपोर्ट का खर्च बढ़ने से मिट्टी का मूल्य बढ़ गया है. प्रतिमा की रंगाई व साजसज्जा के लिए लगने वाली जरूरी सामग्री भी महंगी हो गई है़  कोरोना संकट के चलते गत वर्ष की तुलना में इस बार कम प्रतिमाएं तैयार की गई़ 

    -महेश प्रजापति, मूर्तिकार.