न्यायालय का फैसला किसान के हक में, जिलाधिकारी व भूमी अभिलेख कार्यालय जब्त के आदेश

    मंगरुलपीर. सन 2008 में वाशिम जिले के कारंजा के एक किसान ने नागपुर और औरंगाबाद को जोड़नेवाले राजमार्ग के लिए 1.5 एकड़ गैर-कृषि भूमि का अधिग्रहण किया. लेकिन कोई मुआवजा नहीं मिला. इस मामले में वाशिम सत्र न्यायालय के मंगरुलपीर न्यायालय ने जिलाधिकारी कार्यालय और भूमि अभिलेख कार्यालय को जब्त करने के आदेश दिए.

    निरंजन म्हसालकर निवासी कारंजा के पास 55.46 आरएनए स्वामित्व वाली जमीन है. जो नागपुर -औरंगाबाद हाईवे के बालखेड़ा – वाशिम रोड से जोड़नेवाली जमीन का अधिग्रहण 2008 में किया गया था. उन्होंने 2016 में जमीन का 1 करोड़ 95 लाख 33 हजार 629 रुपए का मुआवजा पाने के लिए प्रयास किया.

    हालांकि मुवावजा न मिलने के कारण जिला सत्र न्यायालय मंगरुलपीर के न्यायाधीश खोज ने जिलाधिकारी कार्यालय एवं भूमि अभिलेख कार्यालय वाशिम को जब्ती की नोटिस जारी की. जब वह जिलाधिकारी कार्यालय में गए तो जिलाधिकारी अपने कक्ष में नहीं थे. तो स्वीय सहायक से मिलने के बाद आदेश दिखाया गया था.

    और स्वयं चव्हाण इसे निवासी उप जिलाधिकारी शैलेश हिंगे के पास ले गए़ हिंगे ने कहा कि मामला सौहार्दपूर्ण ढ़ंग से सुलझाया जाना चाहिए. उनके पैसे से समझौता करे़  म्हसालकर किसान सहित अभी भी 18 किसान हैं, जिनका भुगतान अभी शेष है़  निवासी उप जिलाधिकारी ने एक महीने के भीतर भुगतान होने का बताया़  

    इस दौरान मंगरुलपीर के दिवाणी न्यायालय ने 15 सितंबर को दूसरी बार दिए अपने महत्वपूर्ण फैसले में भी जिलाधिकारी व भूसंपादन कार्यालय की सामग्री जब्त करने के आदेश पारित किए़  इसके अनुसार न्यायालयीन बीलीफ म्हात्रे व किसान म्हसालकर ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे लेकिन जिलाधिकारी नहीं रहने से निवासी उप जिलाधिकारी शैलेश हिंगे को यह आदेश बताया गया़  व चर्चा करके जब्ती की कार्रवाई शुरू की गई.