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    आसेगांव. परिसर में इस खरीफ मौसम में किसानों द्वारा खेतों में इस बार भी सर्वाधिक सोयाबीन व तुअर फसल की बुआई को महत्व दिया गया है. इस के अलावा कपास का बुआई क्षेत्र 2 प्रतिशत तथा मूंग, उड़द, ज्वार व बाजरा का तीन प्रतिशत बुआई क्षेत्र में बोया गया है. इस क्षेत्र में अब फसलें अच्छी बरसात होने से लहराने लगी है़. जो सभी के लिए विशेष कर किसानों की आर्थिक स्थिति के लिए शुभ संकेत वाली है.

    क्षेत्र में पीले सोने के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त सोयाबीन फसल को इस वर्ष किसानों ने हर वर्ष की तरह महत्व देकर आशा और अपेक्षा के साथ खेतों में बुआई की है. सोयाबीन की सर्वाधिक बुआई होने की मुख्य वजह यह भी है कि इस के समर्थन मूल्य में बीते दो वर्षों से भारी उछाल देखने को मिला है. दो वर्ष पूर्व में सोयाबीन के अधिकतम दाम कृषि उपज मंडियों में 3,500 से लेकर 4,200 रुपए तक ही सिमित थे. किंतु वर्ष 2019 से 2021 तक सोयाबीन के दामों में 5 हजार से लेकर 6 हजार रुपए तक दर वृद्धि हुई है.

    इस के अलावा इस वर्ष अभी वर्तमान समय में तो सोयाबीन के दाम दस हजार रुपए प्रति क्विंटल के आंकड़े को भी पार कर गए है. इस के अलावा किसानों को एक और लाभ सोयाबीन बुआई के लिए होता है़  वे लाभ यह है कि संपूर्ण खेत परिसर में किसानों द्वारा सोयाबीन की ही बुआई की जाती है. जिस वजह से वन्य प्राणियों द्वारा किए जाने वाले फसल नुकसान का खतरा कम रहता है. अन्य फसलों की बुआई की जाने पर वन्य प्राणी जिस फसल का बुआई क्षेत्र कम है़  उन फसलों को अधिक नुकसान पहुंचाते है.

    जिसमें ज्वार, बाजरा, कपास समेत अन्य खरीफ की फसलों का समावेश है. क्योंकि सोयाबीन छोड़ सभी फसलों को लगने वाले अंकुर वन्य प्राणियों के लिए मीठे अंकुर रहते है. जिस वजह से अन्य फसलों का अधिक नुकसान होता है. लेकिन इस फसल की उपज को गत वर्ष से कुछ हानि होने लगी है. बारिश की बेरुखी अथवा ज्यादा बारिश से फसलों को नुकसान पहुंचने लगा है. वर्तमान में फसलें लहराकर अच्छी उपज के संकेत तो दे रही है़  किंतु किसानों के घर फसलों को लाने तक सिर्फ अच्छी उपज की अपेक्षा ही रखी जा रही है.

    दस वर्ष पूर्व इन फसलों की उपज दर थी सर्वाधिक 

    वर्ष 2011 से पूर्व आसेगांव समेत परिसर के किसानों द्वारा खेतों में खरीफ की ज्वार, बाजरा समेत कपास फसल को अधिक महत्व दिया जाता था. लेकिन इन सभी फसलों की उपज गिरावट के कारण व सोयाबीन की अच्छी उपज रहने से किसानों ने अन्य फसलों को छोड़ केवल सोयाबीन की फसल की ओर ही रुझान बढ़ गया है़. जिससे परिसर में अब सर्वाधिक क्षेत्र सोयाबीन का हो गया है.