विवाह मुहूर्त से बाजार में बढ़ी रौनक; आभूषण, कपड़ा दूकानों पर ग्राहकों की भीड़

    वाशिम. इन दिनों विवाह मुहूर्त होने से व आनेवाले मई माह में विवाह की धूम रहने के साथ मई महीने में वास्तुशांति मुहूर्त, भूमि पूजन मुहूर्त, मुंज मुहूर्त, सगाई मुहूर्त के साथ ही मराठी अक्षय तृतिया का विशेष मुहूर्त, रमजान ईद त्योहार रहने से बाजार में इस कड़ी धूप में भी भारी रौनक बढ़ गई है़  

    जून महीने में खेती के कार्य व बारिश के मौसम से शादियां करना लोग टालते है़  इसलिए अप्रैल, मई महीने में विवाह के अवसर होने से हर धर्म, समाज के विवाह योग्य युगलो के विवाह कराने के लिए विवाह तिथि निकालते है़  मानसून शुरू होने के लिए करीब सव्वा महीने का अवधि होने व जून महीने में किसानों के खेती कार्य शुरू होने के कारण मई महीने में ही शादियां व विविध कार्यक्रम निपटाने पर जोर दिया जा रहा है़  मई महीने में विवाह के लिए योग्य महीना होने के कारण व अधिक तिथियां होने के कारण इन दिनों बाजारों में खरीददारों की भीड़ नजर आ रही है़ 

    सजनें –संवरने की चाहत 

    चाहे अमिर हो या गरीब शादियों के अवसर पर हर व्यक्ति सजनें संवरने के लिए अहम भूमिका निभाता है़  इस में परिधान तथा आभूषण खरीदी के साथ ही शूज महत्वपूर्ण होने से शहर के मुख्य मार्केट में कपड़ा बाजार, सराफा बाजार व अन्य दूकानों पर भारी भीड़ नजर आने लगी है़  पारंपारीक रुप से दूल्हा, दुल्हन सजने के लिए साज, सज्जा का सामान भी बाजार में रेडिमेड तौर पर मिलने लगा है़ बदलते समय के साथ विवाह समारोह में दुल्हन के साड़ी के जगह पर कुछ जगह पर घागरा चोली का चलन शुरू हो गया है़  महिलाओ की रुची को देखते हुए बाजार में तरह तरह के घागरा चोली, बनारसी शालू बिकने के लिए तैयार है़  ज्वेलरी दूकान पर लोग विविध वस्तु खरीदी कर रहे है़ 

    त्योहारों जैसा रौनक 

    शहर के मुख्य बाजार पाटणी चौक में करीब सभी प्रकार के दूकाने होने से इस चौक में शहरी व ग्रामीण भागों के खरीददारो की सुबह से रात 10 बजे तक भीड़ रहने से यहां पर त्योहारों के जैसी रौनक छायी हुई है़  विशेषता कपड़ा दूकानों के बाहर भी लोगो की भीड़ नजर आ रही है़  स्टील बर्तन के साथ ही फूल, सेहरा, माला बनाने वालो के दूकानों पर भी ग्राहकों की खरीददारी जोरो पर शुरू हो गई है़ 

    कैटरींग का चलन बढ़ा 

    एक समय था कि, जब बारातियों के लिए खान पान की व्यवस्था घर पर करनी पड़ती थी व इस के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती थी़  इस में आचारी से लेकर खाना परोसने तक का जिम्मा विवाह करनेवालो पर रहता था़  लेकिन अब कालांतरण से यह सभी व्यवस्था कैटरींग के भरोसे सौंपी जाने लगी है़  जिससे शादियों में कैटरींग चलन बढ़ गया है़.

    इसमे परप्रांतियों का स्वाद भी बारातियों को मिलने लगा है़  व काम भी आसान हो गया है़  काम ठेके पर देने से व बफे सिस्टम से विवाह समारोह के लिए कैटरींग व्यवसाय ने भी जोर पकड़ा है़  पिछले दो साल में कोरोना संकट के कारण शादी विवाह सीमित प्रमाण में हुए थे़  लेकिन अब कोरोना की पाबंदी से मुक्त होने से सभी समारोह, कार्यक्रम बड़े जोर शोर से होने लगे है.