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    पांढरकवडा. बेमौसम बारिश से हुए नुकसान से किसान उबर नहीं पा रहे हैं. तहसील में कपास की बुआई प्रचुर मात्रा में होती है. उम्मीद की जा रही थी कि इस साल कपास पर कोई इल्ली का प्रकोप नहीं होगा. लेकिन अक्तूबर का महीना खत्म होकर नवंबर शुरू होते ही फिर से गुलाबी बोंडइल्ली ने सीर उठा लिया है.

    जिससे किसानों की चिंता बढ गई है. पांढरकवडा तहसील में, कपास 40,000 हेक्टेयर क्षेत्र में उगाया जाता है. देर से बुवाई और लगातार बारिश के कारण कपास के बोंड भी देर से पकते हैं. नतीजतन, इस साल कपास का उत्पादन कुछ देर से शुरू हुआ. इससे पहले कृषि विभाग ने पिंक बोंडइल्ली के उन्मूलन के लिए बड़ी संख्या में कार्यक्रम लागू किए थे.

    सुंडी के खात्मे के लिए किसानों ने कृषि विभाग द्वारा दिए गए निर्देशों का भी पालन किया. अब कपास की फसल खतरे में है क्योंकि गुलाबी बोंडइल्ली ने तहसील के कुछ हिस्सों पर आक्रमण करना शुरू कर दिया है. सरकार को इस ओर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है. पहले से ही बेमौसम बारिश के कारण किसानों की सोयाबीन और अन्य फसलों को भारी नुकसान हुआ और किसान संकट में थे. वह इस संकट से उबर नहीं पा रहे हैं, लेकिन अब कपास पर अचानक बोंडइल्ली के कारण वह फिर से संकट में हैं.

    कपास की सबसे ज्यादा बुवाई तहसील में होती है. इस क्षेत्र में कपास की उच्च मांग है क्योंकि यह अच्छी गुणवत्ता और लंबे धागे का है. कपास की फसल देर से शुरू होने के कारण इस बार मौसम देर से जारी रहेगा. फसल अच्छी होने पर गुलाबी बोंडइल्ली का अचानक आना कपास की फसल में भारी गिरावट की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है.