छोटे बच्चों के साधारण बुखार को मत किजिए अनदेखा

    यवतमाल. उल्टी, पतला मल बच्चों में कोरोना का लक्षण माना जाता था. अब, हालांकि, अचानक बुखार खतरनाक हो सकती है. एक संभावित तीसरी लहर अभी तक जिले में प्रवेश नहीं कर पाई है. माता-पिता को अपने बच्चों के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है. घबराएं नहीं और गंभीर खतरे से बचने के लिए डॉक्टरी सलाह लें.

    यदि पिछले तीन महीनों में सकारात्मक परीक्षण करने वाले परिवार के किसी बच्चे को तेज बुखार है, तो एंटीबॉडी परीक्षण करवाना महत्वपूर्ण है. उसी से उन्हें कोरोना का पता चला था, लेकिन जब वे पॉजिटिव होते हैं तो अक्सर उनमें कोरोना का पता नहीं चलता है. लक्षणों का इलाज किया जाता है. सर्दी, खांसी, बुखार, जुकाम और खांसी को रोग नहीं माना जाता था. घर पर ही बच्चों का इलाज चल रहा था. कुछ दिनों बाद तबीयत ठीक न होने पर उन्हें डॉक्टर के पास ले जाया गया. यह मामला अब खतरनाक हो गया है. समय पर सही इलाज मिलना बहुत जरूरी है.

    बुखार का मतलब कोरोना नहीं

    बुखार का मतलब कोरोना नहीं है. हालांकि, उचित चिकित्सक की सलाह से सर्दी, बुखार और खांसी का इलाज करना आवश्यक है. डॉक्टर अक्सर परिवार के अन्य सदस्यों की स्वास्थ्य जानकारी के आधार पर उपचार की दिशा निर्धारित करते हैं. इसलिए कोई लापरवाही नहीं है.  सर्दी-बुखार से ज्यादा डेंगू के मरीज हैं. बच्चों में डेंगू के संक्रमण दिखाई दे रहा है. जिससे सावधानियां बरतना जरूरी है.

    बच्चों के लिए अलग कोविड केयर सेंटर बच्चों के लिए अलग कोविड केयर सेंटर बनाया गया है. पीसीसी में 40 बेड, पीआईसीयू में 39 बेड, कुपोषित बच्चों के लिए 6 बेड रिजर्व हैं. इसके अलावा निजी बाल चिकित्सालय, उप जिला अस्पताल के स्तर पर भी बच्चों के इलाज की व्यवस्था की गई है.

    घबराएं नहीं, सावधान रहें

    कोरोना की संभावित लहर आ रही है. इससे डरना गलत है. सतर्क और सावधान रहकर हम अपने बच्चों को इससे बचा सकते हैं. साधारण बीमारियों को भी अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. 

    – डॉ. अजय केशवानी, शिशु रोग विशेषज्ञ