दो सदस्यीय वार्ड बनने से नगर पालिका में चुनाव जोरों पर है, पुराने वार्ड का ढांचा फायदेमंद होने का दावा

    यवतमाल. यवतमाल नगर पालिका का चुनाव, जो जिले में सबसे बड़ा और एकमात्र अ स्तर है, अब आसन्न है. जिले में कोरोना की स्थिति नियंत्रण में होने और नगर पालिका का कार्यकाल समाप्त होने के कारण किसी भी समय चुनाव की घोषणा होने की संभावना है. इसके अलावा जहां अंतरिम वार्ड व्यवस्था में चुनाव कराने का हलचले चल रही है, वहीं अब चुनाव पूर्व के दो सदस्यीय वार्ड ढांचे के अनुसार होंगे.

    यवतमाल नगर पालिका जिले की सबसे बड़ी नगरपालिका है और पिछले कुछ वर्षों से भाजपा के नियंत्रण में है. अब नगर पालिका का आम चुनाव आ गया है. इसलिए निगम के मौजूदा सदस्यों के साथ-साथ कई जो नए सदस्य बनना चाहते हैं, उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है. साथ ही इस बार नगर निगम का चुनाव वार्ड के आधार पर होना था.

    इस संबंध में चुनाव आयोग ने नगर निगम प्रशासन को वार्ड प्रारूप प्रभागरचना तैयार करने का निर्देश दिया था. वहीं से कई इच्छूकों ने तैयारी शुरू कर दी थी. हालांकि, सरकार ने अब दो सदस्यीय वार्ड सिस्टम पर फैसला किया है. सरकार के इस फैसले ने कई लोगों के सपने बदल दिए. वहीं बीजेपी, कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना दावा कर रही है कि बहुसदस्यीय वार्ड बनाने का तरीका फायदेमंद है. इसलिए नागरिकों में उत्सुकता है कि इस बार बहुसदस्यीय वार्ड व्यवस्था में कौन सी पार्टी अपना दमखम दिखाएगी.

    यवतमाल नगर निगम का चुनाव 2017 में हुआ था. भाजपा ने नगर पालिका में बहुमत हासिल किया था. हालांकि नगराध्यक्ष शिवसेना के होने के कारण पिछले पांच साल से नगर पालिका में अंदरूनी राजनीति चल रही है. राज्य सरकार पिछले साल के शीतकालीन सत्र में एक सदस्यीय वार्ड के अनुसार चुनाव को लेकर सकारात्मक थी.

    बहुत से लोग अपने वोट के अधिकार के लिए लड़ने की तैयारी कर रहे थे. हालांकि, अब सरकार ने मल्टी मेंबर वार्ड सिस्टम पर फैसला लिया है. यवतमाल नगर पालिका में पिछले चुनाव की तरह दो सदस्यीय वार्ड व्यवस्था होगी. वर्तमान में नगर पालिका में 29 भाजपा, 11 कांग्रेस, 9 शिवसेना, 4 राकांपा और 3 निर्दलीय दल हैं. पिछले चुनाव में दो सदस्यीय वार्ड व्यवस्था से भाजपा को फायदा हुआ था. पार्टी को भरोसा है कि इस चुनाव में भी बीजेपी को फायदा होगा. शहर में कोई काम नहीं हुए. पहले से कहीं ज्यादा नागरिक बेहाल हैं. इसलिए दावा किया जा रहा है कि इस साल कांग्रेस की जीत वोटरों की होगी.

    सभी दलों की आत्मनिर्भरता

    अगले कुछ दिनों में नगर निगम के चुनाव होने की संभावना है. बीजेपी अपने दम पर ये चुनाव लड़ने जा रही है. हालांकि, चूंकि पूरे राज्य में महा विकास अघाड़ी बनाकर चुनाव लड़ा जा रहा है, ऐसे में सवाल यह है कि क्या नगर पालिका में कांग्रेस, शिवसेना और राकांपा एक साथ चुनाव लड़ेंगी. स्वतंत्रता के लिए लड़ने के लिए सभी पार्टी सदस्यों की भूमिका है.

    उम्मीदवारी पाने के लिए उम्मीदवारों से लेकर वरिष्ठों तक की सेटिंग शुरू

    नगर पालिका में अब दो सदस्यीय वार्ड संरचना के अनुसार चुनाव होंगे. इसलिए हर पार्टी के मौजूदा नगरपालिका सदस्य अपनी उम्मीदवारी तय करने की तैयारी कर रहे हैं. वहीं, जिन उम्मीदवारों ने निगम के सदस्य बनने की कोशिश शुरू कर दी है, उन्होंने इच्छूकों ने अपने पार्टी की उम्मीदवारी पाने के लिए मंच तैयार करना शुरू कर दिया है. कौन सफल होगा यह जानना जरूरी है.

    सरकार के बदलते फैसले से कई लोगों के सपनों पर पानी

    आज होगी नगर प्रशासन की बैठक

    नगर निगम चुनाव के लिए वार्ड ढांचा तैयार करने का कार्य नगर प्रशासन द्वारा शुरू किया गया था. हालांकि, अब जबकि चुनाव दो सदस्यीय वार्ड संरचना के अनुसार होगा, सोमवार को नगर निगम प्रशासन की बैठक होगी और सरकार के नए निर्णय के अनुसार काम करने का निर्णय लिया जाएगा.